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दिल्ली रेप: नाबालिग अभियुक्त पर फ़ैसला फिर टला

 गुरुवार, 25 जुलाई, 2013 को 12:16 IST तक के समाचार
नाबालिग अभियुक्त

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में जुविनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग अभियुक्त के खिलाफ़ पाँच अगस्त तक के लिए टाल दिया है. ये फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका के मद्देनज़र किया गया है.

बीबीसी संवाददाता शालू यादव को नाबालिग अभियुक्त के वकील ने ये जानकारी दी है. पहले अदालत ने फ़ैसला 25 जुलाई तक के लिए टाल दिया था.

दरअसल जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की थी कि नाबालिग की परिभाषा को दोबारा तय किया जाए. सुप्रीम कोर्ट उनकी अर्ज़ी पर 31 जुलाई को सुनवाई करेगा.

उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि “ऐसे अभियुक्तों की मानसिक और बौद्धिक उम्र को” ध्यान में रखा जाए न कि 18 साल की उम्र को. स्वामी ने कोर्ट से ये भी कहा था कि अगर जुविनाइल जस्टिस बोर्ड दिल्ली गैंगरेप केस में फैसला सुनाता है तो उनकी अर्जी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

मामला

इस क्लिक करें नाबालिग किशोर पर बलात्कार, हत्या और अपहरण समेत कई आरोप लगे थे और दोषी पाए जाने पर नाबालिग अभियुक्त को तीन साल तक की सज़ा हो सकती है जिस दौरान उसे सुधारगृह में रखा जाएगा.

ये मामला पिछले साल क्लिक करें 16 दिसंबर का है. फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही एक लड़की के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार हुआ था.

पुलिस के मुताबिक अभियुक्तों ने लड़की और उसके पुरुष मित्र के साथ मारपीट भी की थी.

लड़की को इलाज के लिए क्लिक करें सिंगापुर भी ले जाया गया जहां उनकी क्लिक करें मौत हो गई.

ख़ुदकुशी

दिल्ली गैंगरेप

इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है

इस मामले में कुल छह लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. इनमें से एक को कुछ महीने पहले जेल में मृत पाया गया था. जेल अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने क्लिक करें ख़ुदकुशी की है जबकि परिवार वालों का आरोप था कि ये हत्या का मामला है.

इस मामले की सुनवाई क्लिक करें फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है.

नालाबिग़ अभियुक्त समेत बाक़ी चारों अभियुक्त बलात्कार के आरोप से इनकार करते आए हैं. बाकी अभियुक्त अगर दोषी पाए गए तो उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है.

इस घटना को लेकर भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय जगत में भी काफ़ी आक्रोश हुआ था. कई दिनों तक भारत के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होते रहे थे.

नागरिक संगठनों से लेकर राजनीतिक पार्टियों ने महिला सुरक्षा को लेकर नया क़ानून बनाने की माँग की थी. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार बलात्कार निरोधक क़ानून भी लेकर आई है.

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