बटला हाउस मुठभेड़ मामले में आ सकता है फ़ैसला

  • 25 जुलाई 2013

बहुचर्चित बटला हाउस मुठभेड़ मामले में अदालत आज अपना फ़ैसला सुना सकती है. इस मुठभेड़ के दौरान दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा मारे गए थे.

इस मामले में गिरफ़्तार शहजाद अहमद पर पुलिस टीम पर गोलियाँ चलाने और इंस्पेक्टर शर्मा की हत्या का आरोप है. दिल्ली की अदालत इसी मामले में फ़ैसला सुनाने वाली है.

19 सितंबर 2008 को दिल्ली पुलिस ने जामिया नगर स्थित बटला हाउस इलाके में हुई मुठभेड़ में कथित तौर पर इंडियन मुजाहिद्दीन के दो चरमपंथियों को मारने का दावा किया.

इस दौरान एक पुलिस अधिकारी भी बुरी तरह घायल हो गए थे और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस मुठभेड़ पर कई सवाल उठे थे.

दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि मुठभेड़ में मारे गए लोग दिल्ली में उसी साल हुए विस्फोटों में शामिल थे और उनका संबंध आज़मगढ़ से था.

मुठभेड़ के दौरान दो कथित चरमपंथी भागने में सफल रहे थे जिनमें से एक शहजाद अहमद को बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने गिरफ़्तार किया था.

दिल्ली पुलिस के आरोपपत्र के मुताबिक़ शहज़ाद और उनके साथियों ने 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रची थी. इन विस्फोटों में 30 लोग मारे गए थे.

साजिश

पुलिस का दावा है कि ये पूरी साजिश बटला हाउस के मकान नंबर एल-18 में रची गई थी.

इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि आईएम के कुछ सदस्य जामिया नगर में छिपे हैं. मुठभेड़ के दौरान उन्हें को चार गोलियां लगी थीं और उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

शहज़ाद पर दिल्ली पुलिस की टीम पर गोली चलाने और इंस्पेक्टर शर्मा की हत्या का आरोप लगाया गया है. शहज़ाद ने इन आरोपों से इन्कार किया है.

बटला हाउस मुठभेड़ की न्यायिक जांच हो

लेकिन इस मामले में जमकर राजनीति हुई. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि ये मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी. 2012 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने आज़मगढ़ पहुंचकर इस मुठभेड़ में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने का वादा किया था.

पुलिस को राहत

समाजवादी पार्टी ने भी मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की थी. साल 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस मामले की जांच करने के आदेश दिया था. दो महीने बाद जुलाई 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुठभेड़ असली थी और पुलिस की कार्रवाई नियमों के मुताबिक़ थी.

जांच की मांग

तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी दिग्विजय के दावों को खारिज़ कर दिया था. कुछ मुस्लिम सांसदों ने मामले की जांच की मांग की थी जिस पर चिदंबरम ने कहा था कि मुठभेड़ असली थी. उन्होंने साथ ही कहा था कि मामले की दोबारा जांच की कोई जरूरत नहीं है.

बटला मुठभेड़ की तस्वीरें देखकर रोई थी सोनिया

पिछले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रचार के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने दावा किया था पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को बटला हाउस मुठभेड़ की तस्वीरें दिखाई गई थीं तो उनके मुंह से आह निकल गई थी.

लेकिन इस पर होहल्ला होने के बाद खुर्शीद ने कहा था कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया.

मुठभेड़ की रिपोर्ट पर उठे सवाल

मानवाधिकार आयोग से क्लीन चिट मिलने के बावजूद मृतकों की पहचान और उनके शरीर पर लगी गोलियों को लेकर बार-बार इस मुठभेड़ पर सवाल उठते रहे हैं.

दलील

अभियोजन पक्ष ने कुल 70 प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जिनमें मुठभेड़ में शामिल पुलिस दल के छह सदस्य भी शामिल हैं.

अभियोजन पक्ष का दावा है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त समय हैं कि शहज़ाद मुठभेड़ के समय फ्लैट में मौजूद थे और उन्होंने पुलिस पर गोली चलाने के बाद बालकनी से छलांग लगा दी थी.

लेकिन बचाव पक्ष ने दिल्ली पुलिस के दावे पर कई सवाल उठाए थे. उसकी दलील है कि बैलिस्टिक रिपोर्ट के मुताबिक़ शर्मा के शरीर से निकली गोलियां घटनास्थल से मिली गन से मेल खाती हैं न कि शहज़ाद से मिली गन से.

साथ ही इस बात पर भी सवाल उठे हैं कि शर्मा ने बुलैटप्रूफ़ जैकेट क्यों नहीं पहना था और उनके दो साथी निहत्थे क्यों थे.

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