'विषाक्त भोजन' से मरने वाले बच्चों की संख्या 22 हुई

  • 17 जुलाई 2013
बिहार छपरा

बिहार के छपरा ज़िले के मशरख़ ब्लॉक में कथित रूप से विषाक्त भोजन खाने से मरने वाले स्कूली बच्चों की संख्या 22 हो गई है.

मंगलवार को ही गंभीर रूप से बीमार 31 बच्चों को पटना के पीएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनमें कुछ की हालत नाज़ुक बताई जा रही है.

मशरख़ ब्लॉक के जजौली पंचायत में स्थित धर्मसती विद्यालय के बच्चों को जब सरकार की मध्याह्न भोजन योजना के तहत मंगलवार दोपहर का भोजन परोसा गया तो उसे खाते ही बच्चे बीमार पड़ गए.

बिहार के मानव संसाधन मंत्री पीके शाही ने मंगलवार को घटना स्थल का दौरा किया. इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए पीके शाही ने बताया कि शुरूआती जांच से पता चला है कि खाने में कोई ज़हरीला पदार्थ था लेकिन खाने में वो कैसे मिला इसकी जांच चल रही है.

'खाने में कीटनाशक'

खाना खाने के बाद कई बच्चों को उल्टियाँ होने लगीं. लेकिन उस समय वहाँ कोई सुविधा नहीं थी. इन बच्चों को किसी तरह अस्पताल पहुँचाया गया. बाद में एम्बुलेंस वहाँ पहुँची.

बीमार बच्चों को छपरा सदर अस्पताल और आसपास के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

सुनिए श्याम रजक से बीबीसी की बातचीत

इस बीच ख़बरों के मुताबिक़ स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफ़ी रोष है कि राहत समय पर नहीं पहुंची. लेकिन राज्य खाद्य एंव आपूर्ति मंत्री श्याम रजक ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत के दौरान श्याम रजक ने कहा, ''छपरा से मशरख़ की थोड़ी दूरी है. छपरा से मशरख़ आने में थोड़ा समय तो लगेगा ही. लेकिन बहुत जल्द डॉक्टरों की टीम गई. हमारे मुख्यमंत्री बहुत संवेदनशील हैं, जैसे ही उन्हें जानकारी मिली उन्होंने सभी चीज़ को सुचारू रूप से करने का आदेश दिया. फिर भी थोड़ी कमी तो रह ही जाती है.''

श्याम रजक ने विश्वास दिलाया कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को बख़्शा नहीं जाएगा. उनका कहना था, ''सरकार संवेदनशील है. मुख्यमंत्री जी ने बिल्कुल स्पष्ट कहा है कि जो भी दोषी होंगे किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. लेकिन इस समय विपक्षी पार्टियों को भी राजनीति करने से बचना चाहिए.''

छपरा सदर अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि जब बच्चों को एंटीऑर्गेनो फ़ॉस्फ़ोरस का डोज़ दिया गया तो उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ जिसके आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि खाने में ऑर्गेनो फ़ॉस्फ़ोरस कीटनाशक मिल गया हो.

डॉक्टरों के अनुसार ये कीटनाशक बच्चों पर बहुत जल्दी असर करता है और शायद यही वजह है कि मारे गए सभी बच्चों की उम्र 10 साल से कम है.

बिहार में मिड-डे मील के निदेशक आर कृष्णन और राज्य के शिक्षा सचिव राहुल सिंह ने भी मंगलवार की शाम घटना स्थल का दौरा किया.

छपरा, बिहार
डॉक्टरों के अनुसार खाने में कीटनाशक हो सकते हैं जो कि मौत की वजह बनी.

फ़ॉरेंसिक जांच के आधार पर उन्होंने ने भी कहा कि खाने में कीटनाशक के मिले होने की आशंका है.

बंद

इस बीच प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को छपरा बंद का ऐलान किया है. भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को नैतिकता के आधार पर सत्ता में बने रहने का कोई हक़ नहीं.

एक और विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को पूरे सारण ज़िले के बंद का आह्वान किया है.

महाराजगंज के सांसद आरजेडी के प्रभुनाथ सिंह ने इलाक़े का दौरा किया और कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये घटना हुई है.

इस मौक़े पर छपरा के सांसद और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा, "मुझे मशरख गाँव से दुखद ख़बर मिली है कि वहाँ बच्चों को ज़हरीला खाना परोसा गया. मुझे प्रभुनाथ सिंह जी से इसका पता चला जो ख़ुद मौक़े पर गए हैं. मुझे पता चला है कि कुछ बच्चों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि कुछ की अस्पताल में. कई बच्चे बीमार हैं."

जाँच

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं. जाँच प्रमंडलीय आयुक्त और छपरा के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) करेंगे.

मुख्यमंत्री ने मारे गए बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

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