बाढ़ के बाद बारिश से उत्तराखंड में दहशत

  • 5 जुलाई 2013
उत्तराखंड में भारी बारिश से दहशत

उत्तराखंड के उत्तरी इलाकों में शुरू हुई तेज़ बारिश ने एक बार फिर राहत पहुंचाने के काम में अड़ंगा लगा दिया है. दोबारा मूसलाधार बारिश शुरू होने के साथ ही लोगों में खौफ़ का माहौल देखा जा रहा है.

बारिश की हर बौछार के साथ लोगों की नींद उडती जा रही है. इससे पहले 17 जून की प्रलयकारी बारिश के बाद राज्य का उत्तरी इलाका बुरी तरह से ध्वस्त हो गया था.

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई तेज कर दें.

ख़ासतौर पर पिंडर, अलकनंदा, भागीरथी, मन्दाकिनी और गँगा के किनारे बसने वाले लोगों को उपरी इलाकों में चले जाने के लिए कहा गया है.

आफत की बारिश

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उत्तरकाशी और दूसरे निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू हो गया है.

मौसम विभाग ने पाँच जुलाई से तीन दिनों तक राज्य के कई स्थानों पर भारी बारिश होने की चेतावनी दी है. चेतावनी में कहा गया है कि इस दौरान 70 से 90 मिलीमीटर तक वर्षा हो सकती है.

जिन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी गयी है उनमें टिहरी, नैनीताल, कुमाऊँ, चमोली और पिथौरागढ़ शामिल हैं.

गुप्तकाशी और आसपास के इलाकों में गुरुवार को शाम होते ही शुरू हुई बारिश से लोग दहशत में हैं.

कई रास्ते अब भी बंद पड़े हैं और इनकी मरम्मत में एक साल का वक़्त लग सकता है.

राहत कार्यों पर असर

उत्तराखंड में राहत और बचाव
भारी बारिश के चलते राहत और बचाव कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है.

लोगों को डर है कि अगर तेज़ बारिश लगातार तीन दिनों तक होती रही तो उन रास्तों पर भी आवागमन ठप हो जाएगा, जिनके जरिए ऋषिकेश होते हुए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.

बीते दिनों हुई प्रलयकारी बारिश से पहले रुद्रप्रयाग से केदारनाथ आने के लिए तिलवाडा और अगस्तमुनी से होकर जाना पड़ता था. लेकिन अब ये रास्ता पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस रास्ते की मरम्मत में कई महीने लग सकते हैं क्योकि बरसात में इस सड़क पर काम नहीं किया जा सकता है.

रुद्रप्रयाग से तिलवाडा की दूरी महज़ नौ किलोमीटर है. लेकिन दूसरे रास्ते से रुद्रप्रयाग से तिलवाड़ा तक का सफ़र 40 किलोमीटर का हो गया है. जिन्हें केदारनाथ जाना है वो तिलवाडा से मयाली होते हुए जा रहे हैं.

बारिश काफी तेज है और बारिश के रुकते ही आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन के अलावा सीमा सड़क संगठन का अमला सड़कों की जांच के लिए निकलेगा. बारिश के दौरान इन इलाकों में चट्टानों के खिसकने और सड़क के धंस जाने की घटनाएं आम हैं.

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