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दिल्ली गैंगरेप: नाबालिग अभियुक्त पर फैसला 11 को

 शुक्रवार, 5 जुलाई, 2013 को 15:26 IST तक के समाचार
प्रदर्शन

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे.

पिछले साल दिल्ली में एक लड़की के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामले में नाबालिग अभियुक्त के खिलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई पूरी हो गई है.

जुविनाइल जस्टिस बोर्ड ने बताया है कि फ़ैसला 11 जुलाई को सुनाया जाएगा. इस नाबालिग किशोर पर बलात्कार, हत्या और अपहरण समेत कई आरोप लगे थे.

क्लिक करें कम नहीं होगी किशोर अपराधियों की उम्र

दोषी पाए जाने पर उसे तीन साल तक की सज़ा हो सकती है जिस दौरान उन्हें सुधारगृह में रखा जाएगा.

ये मामला पिछले साल 16 दिसंबर का है जब फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही एक लड़की दिल्ली में अपने पुरुष मित्र के साथ लौट रही थी. बस में लौटते हुए लड़की का सामूहिक बलात्कार हुआ था.

पुलिस के मुताबिक अभियुक्तों ने दोनों का काफ़ी मारा था और लड़की के साथ क्लिक करें बलात्कार किया. इलाज के लिए लड़की को सिंगापुर भी ले जाया गया. लेकिन सिंगापुर में उनकी मौत हो गई.

बर्बर घटना

दिल्ली सामूहिक बलात्कार की पीड़ित लड़की फ़िज़ियोथैरेपी की पढ़ाई कर रही थी

नालाबिग़ अभियुक्त समेत बाक़ी चारों अभियुक्त बलात्कार के आरोप से इनकार करते आए हैं. बाकी अभियुक्त अगर दोषी पाए गए तो उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है.

क्लिक करें 'बलात्कार के एक लाख अभियुक्त बरी'

इसके अलावा एक छठा अभियुक्त भी था जो जेल में कुछ महीने पहले मृत पाया गया था. जेल अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ख़ुदकुशी की है जबकि परिवारवालों का आरोप है कि ये हत्या का मामला है.

सामूहिक बलात्कार की इस घटना को लेकर भारत ही नहीं अंतरराष्ट्रीय जगत में काफ़ी आक्रोश हुआ था. कई दिनों तक भारत के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होते रहे थे.

नागरिक संगठनों से लेकर राजनीतिक पार्टियों ने महिला सुरक्षा को लेकर नए क़ानून बनाने की माँग की थी. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार बलात्कार निरोधक क़ानून भी लेकर आई है.

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है.

किशोर आयु सीमा पर विवाद

मामले की सुनवाई साकेत में चल रही थी

बलात्कार मामले में नाबालिग़ अभियुक्त की बात सामने आने के बाद इस पर भी काफ़ी बहस हुई थी कि ऐसे अपराधों के लिए किशोर आयु सीमा घटानी चाहिए.

लेकिन सरकार ने इस साल के शुरु में ही स्पष्ट कर दिया था कि उसका जुविनाइल जस्टिस एक्ट के तहत किशोर आयु सीमा घटाने का कोई इरादा नहीं है.

जनवरी में गृह मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की बैठक बुलाई थी जिसमें सुझाव दिया गया था कि किशोर आयु सीमा 18 से घटाकर 16 कर दी जाए.

लेकिन अपराध संहिता में संशोधन पर गठित जस्टिस (सेवानिवृत्त) जेएस वर्मा की अध्यक्षता वाली समिति ने बच्चों की आयु सीमा घटाने का समर्थन नहीं किया था.

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