उत्तराखंडः 3000 अब भी लापता, आपदा पर राजनीति

  • 1 जुलाई 2013
उत्तराखंड में तबाही
प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण उत्तराखंड के लिए बड़ी चुनौती है.

उत्तराखंड में भयंकर बाढ़ और भूस्खलन के दो हफ़्ते बाद भी अभी तक लगभग 3000 लोग लापता हैं. राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ये जानकारी दी है.

उत्तराखंड में आई प्रलयंकारी आपदा में फंसे लोगों को निकालने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है और इस आपदा में जीवित बचे तीर्थयात्री और सैलानी कभी पहाड़ न आने की कसमों के साथ सुरक्षित अपने घर लौट गए हैं.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और अंबिका सोनी के साथ देहरादून में प्रेस वार्ता करते हुए विजय बहुगुणा ने बताया कि अब तक एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

आपदा पर राजनीति

इस बीच आपदा पर सोमवार को राजनीति भी तेज हो गई. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उत्तराखंड सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए सरकार को बर्खास्त करने की मांग की.

कांग्रेस ने इसका तीखा जबाव दिया. केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने सुषमा स्वराज के बयान को शर्मनाक बताया.

केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने सुषमा स्वराज पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया कि न ही सुषमा और न ही अरुण जेटली उत्तराखंड गए.

इस पर जबाव देते हुए सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया, "सच यह है कि जब 18 जून को मैंने गृहमंत्री से इस बारे में बात की थी और ट्वीट किए थे तब मैंने ही आपको उत्तराखंड की आपदा के इस पैमाने के बारे में सजग किया."

कांग्रेस के संचार विभाग के नए प्रमुख अजय माकन ने ट्वीट करते हुए कहा कि आपदा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, "अभी आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई है और बीजेपी इस पर राजनीति कर रही है. इससे पहले बीजेपी ने 15 हजार लोगों को सुरक्षित निकालने का दावा किया था."

पुनर्वास के लिए प्राधिकरण

उत्तराखंड में बाढ़ से तबाही

विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए उत्तराखंड पुनर्वास और पुनर्निर्माण प्राधिकरण बनाने की घोषणा भी की. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का पुनर्वास भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाएगा. प्रदेश के मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के चेयरमैन होंगे.

उत्तराखंड पुनर्वास कार्यक्रम में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी मदद की जाएगी. घरों और ढाबों को सरकार फिर से बनाकर देगी. राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों का बिजली बिल भी माफ करेगी. सरकार उन गांवों में फ्री राशन भी लोगों को उपलब्ध करवाएगी जहाँ संपर्क कट गया है.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने घोषणा की कि, “प्रभावित इलाकों में एक साल तक बिजली और पानी का बिल माफ कर दिया जाएगा और एक साल तक लोगों को सरकारी बैंकों से लिए गए कर्ज पर ब्याज भी नहीं देना होगा.”

मुख्यमंत्री ने छात्रों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणा की. उत्तराखंड में 12वीं तक के प्रत्येक छात्र को एक बार 500 रुपए की मदद और बारहवीं से आगे की पढ़ाई कर रहे प्रत्येक छात्र को एक बार एक हजार रुपये की मदद दी जाएगी.

आपदा में अनाथ हुए बच्चों का सारा खर्च और जीवन यापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार संभालेगी.

केदारनाथ- रीति रिवाज़ से हुआ अंतिम संस्कार

नदी किनारे नहीं बनेंगे मकान

नदी किनारे बने मकान

राज्य में अब नदी के किनारे निर्माण करना अवैध होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के किनारे किसी भी भवन को बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यदि कहीं कोई निर्माण होता है तो संबंधित अधिकारी को दंडित किया जाएगा.

हालांकि मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के इस सवाल का जबाव नहीं दिया कि नदी के किनारे कैसे तय किए जाएंगे. जो मकान पहले से बने हैं उनका क्या होगा इस पर भी मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा.

'नहीं पता चलेगी मृतकों की असल संख्या'

राहत सामग्री पहुँचाने में दिक्कतें

ट्रक से राहत सामग्री उतारते लोग
राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने में भारी दिक्कतें आ रही हैं

उत्तराखंड जब बसेगा ,ये दूर की बात है फिलहाल लोगों तक राहत सामग्री पंहुचाना ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.भारी मात्रा में खाद्यान्न सामग्री होने के बावजूद खराब मौसम के कारण हेलीकॉ्पटर उड़ान में बाधा है और ध्वस्त सड़कों के कारण राहत सामग्री दुर्गम इलाकों तक पंहुच ही नहीं पा रही है.

राहत सामग्री के वितरण में अनियमितता के भी आरोप लग रहे हैं. विपक्ष के नेता अजय भट्ट का कहना है कि, “राहत सामग्री सिर्फ एक हेलीपैड से दूसरे हेलीपैड तक पंहुचा देने भर से कुछ नहीं होगा.उन गांवों तक सरकार पंहुच ही नहीं रही है जहां सड़कें टूटी हुई हैं और सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग बिल्कुल फेल हो चुका है. “

बताया जाता है कि चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के 200 से अधिक गांवों को रसद का इंतजार है.

चिंता की बात ये है कि अभी दो महीने तक मानसून का असर बना रहेगा और इस कारण पक्की सड़कें नहीं बनाई जा सकतीं. फिर ऊँचे पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी शुरू हो जाएगी.

उधर इस आपदा में मारे गए लोगों की अंत्येष्टि में भी खराब मौसम और ध्वस्त सड़क संपर्क बाधा बना हुआ है. अभी केदारघाटी में ही शवों की तलाशी का काम पूरा नहीं हो पाया है. पुलिस उपमहानिरीक्षक जी एस मार्तोलिया बताते हैं कि, “कठिनाइयां बहुत हैं, अभी हम कई इलाकों तक पहुँचे ही नहीं हैं तो संख्या कैसे बताई जा सकती है?”

इस बीच मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड में मानसून का व्यापक असर बना हुआ है और बारिश में बढ़ोत्तरी के आसार हैं. लिहाजा आपदा और राहत के अभियान के लिए ये एक युद्ध जैसी स्थिति है जहाँ कुछ भी अनुकूल नहीं है.

हालाँकि सरकार दावा कर रही है कि 31 जुलाई तक पानी-बिजली और सड़क की बुनियादी सुविधाएं बहाल कर दी जाएंगी लेकिन पिछले 15 दिनों से तबाही और बर्बादी में घिरे लोग शायद ही इन दावों पर यकीन कर पाएंगे.

केंद्रीय मदद

सड़कें टूटने से गांवों से संपर्क कटा

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा, "उत्तराखंड को मिलने वाली आर्थिक मदद के एक-एक पैसे को प्राधिकरण पारदर्शिता से खर्च करेगा. केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आने वाली सहायता के पैसे को पूरी ईमानदारी से खर्च किया जाएगा."۔

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने एक हज़ार करोड़ रुपए की मदद की घोषणा की है. जल्द ही वित्त मंत्रालय की टीम हालात का जायजा लेने उत्तराखंड आएगी. विश्व बैंक और एशिया डेवलपमेंट बैंक की टीम भी जायज़ा लेने के लिए उत्तराखंड आ रही हैं. हमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी मदद की उम्मीद है. हमें दो से ढाई हजार करोड़ की अतिरिक्त मदद की उम्मीद है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉइड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फेसबुक या ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं)

संबंधित समाचार