उत्तराखंड में शवों का सामूहिक दाह संस्कार

  • 27 जून 2013
केदारघाटी में आवश्यक उपकरणों की कमी के चलते शवों को मलबे से बाहर में काफी दिक्कत आ रही है.

उत्तराखंड की प्रलयकारी आपदा में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार संसाधनों की कमी के चलते एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है.

गुरुवार रात आई पुलिस मुख्यालय की विज्ञप्ति के अनुसार अलग-अलग जगहों में 43 और शवों का दाह संस्कार किया गया. इसमें से केदारनाथ के इलाके में 15, हरिद्वार में 18, ऋषिकेश में तीन, पौड़ी में पाँच और टिहरी में दो शवों के दाह संस्कार शामिल हैं.

केदारनाथ में क़रीब 10 दिनों से दबे शवों के अंतिम संस्कार के लिए जिस टीम को भेजा गया, वह वहाँ खाली हाथ पहुँची थी. उपकरणों के अभाव में जिन शवों को हाथ से खींचकर निकाला जा सकता था, उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. कई शव अब भी मलबे में दबे हैं.

उत्तराखंड में पीएसी के उपमहानिरीक्षक संजय गुंज्याल को केदारनाथ में सामूहिक दाह संस्कार की ज़िम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने केदारनाथ से लौटने के बाद देहरादून में कहा कि, “वहां शवों की संख्या काफ़ी थी, बिना उपकरण की मदद से उन्हें निकाला नहीं जा सकता था. हमारे पास उपकरण नहीं थे और जिन शवों को हाथ से निकाला जा सकता था उनका दाह संस्कार कर दिया गया.”

उन्होंने बताया, “जो भी सीमित संसाधन थे, उसमें हमने अपनी तरफ़ से बेहतर ढंग से जो धार्मिक अनुष्ठान हो सकते थे उसके साथ सामूहिक दाह संस्कार किया.”

बीमारी की आशंका

सेना लोगों को बचाने के लिए जी-जान से लगी है, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड की त्रासदी बड़ी संख्या में लोगों की जान ले चुकी है.

प्रशासन की कोशिश है कि शवों के अंतिम संस्कार का काम जल्द पूरा कर लिया जाए क्योंकि शवों के सड़ने से कई तरह की संक्रामक बीमारी फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है.

केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत ने गुप्तकाशी से बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि, “अंतिम संस्कार केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड में किया जा रहा है. लेकिन इनकी संख्या क्या है इसके बारे में मुझे नहीं पता है. ”

उन्होंने कहा कि इस पूरे इलाक़े में बीमारी फैलने की आशंका हो गई है, इसलिए इस समय यहाँ आने से बचना चाहिए.

देहरादून में पुलिस महानिरीक्षक आरएस मीणा ने बीबीसी को बताया, “कल देर शाम केदारनाथ में 18 शवों का दाह संस्कार कर दिया गया. ये एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है क्योंकि शव जगह-जगह पर बहुत बुरी हालत में हैं. उनको इकठ्ठा किया जा रहा है और अंतिम संस्कार के पहले शवों की तस्वीर और उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है.”

राहत और बचाव

लोगों ने अपनों की तलाश में जगह-जगह पोस्टर चिपकाएं हैं.

सरकार के आपदा प्रंबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक एक लाख 4095 लोगों को सुरक्षित स्थानों में पंहुचा दिया गया है और अब मुश्किल से 1500 के क़रीब लोग ही वहां फंसे रह गये हैं. विभाग के अनुसार अगर मौसम ने साथ दिया तो कल तक सभी फंसे हुए लोगों को निकालने का काम पूरा हो जाना चाहिये.

पिथौरागढ के दारमा, व्यास और रालमा घाटी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी 700 लोग फंसे हैं. सेना के हेलिकॉप्टर वहां भी लगें हैं.

पिथौरागढ़ में आज भूकंप के झटके महसूस किए गए जिससे दहशत फैल गई.

बताया जाता है कि अभी भी उत्तराखंड के 100 से अधिक गांवों का सड़क मार्ग से संपर्क कटा हुआ है. इसलिए सरकार के अनुसार सेना और वायुसेना के हेलिकॉप्टर फंसे यात्रियों को निकालने के बाद भी एक महीने तक प्रभावित इलाक़ों में बने रहेंगे.

इस बीच हेमकुंड साहिब के कपाट फ़िलहाल बंद कर दिए गए हैं. आमतौर पर ये कपाट अक्तूबर के महीने में ठंड की शुरूआत पर बंद होते थे लेकिन इस बार की आपदा से हेमकुंड सहित चार धाम यात्रा पर पूरी तरह ग्रहण लग गया है.

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