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उत्तराखंड आपदा: 'रामबाड़ा में तो सब साफ़ हो गया'

 गुरुवार, 27 जून, 2013 को 07:25 IST तक के समाचार

उत्तराखंड की तबाही की चपेट में आने वाले लोगों में देश के अलग-अलग हिस्सों से चार धाम की यात्रा करने आए लोग शामिल थे.

ये वे लोग हैं जो अलग-अलग ट्रैवल्स की गाड़ियों में बुकिंग कराके केदारनाथ की यात्रा पर निकले थे.

"हमारे नवासी यात्रियों में अब तक महज 29 ही पहुंच पाए हैं. साठ लोग लापता हैं. इन लोगों के साथ चार कर्मचारी भी भेजे थे, उसमें तीन वापस आए हैं, एक का पता नहीं."

भगवान दास, शिव शंकर टूर ट्रैवल्स

ऋषिकेश में शिवशंकर ट्रैवल्स चलाने वाले भगवान दास कहते हैं, “नौ जून को हमारा टूर शुरू हुआ था. कुल नवासी यात्री हमारे टूर में शामिल थे. इन्हें हमने 27 सीटों वाली तीन बसें और एक छोटी गाड़ी से भेजा था. इसमें मुंबई की दो सवारियाँ थीं. मध्य प्रदेश, राजस्थान के लोग थे. जम्मू कश्मीर की भी तीन सवारियां मौजूद थीं.”

'इतनी बड़ी तबाही नहीं देखी'

ऐसे में ट्रैवल्स चलाने वालों के यहां भी बड़ी संख्या में लोग अपनों की तलाश में पहुंच रहे हैं लेकिन इन ट्रैवल्स वालों को भी अपने यात्रियों के बारे में कुछ अता-पता नहीं चल पा रहा है.

भगवान दास बताते हैं, “हमारे नवासी यात्रियों में से अब तक महज 29 ही पहुंच पाए हैं. साठ लोग लापता हैं. इन लोगों के साथ चार कर्मचारी भी भेजे थे, उसमें तीन वापस आए हैं, एक का पता नहीं.”

भगवान दास से ये पूछा कि टूर पर गए लोगों के साथ उनका अंतिम संपर्क कब हो पाया था?

इस सवाल के जवाब में भगवान दास कहते हैं, “मेरे कर्मचारी ने मुझे फोन पर बताया था कि सभी यात्री केदारनाथ में दर्शन करके लौट रहे हैं. शाम पांच से साढ़े आठ बजे रात के बीच वे लोग लौट रहे थे.”

इसके अगली सुबह ही सैलाब आया और भगवान दास का अपने यात्रियों और कर्मचारियों से अगले कई दिनों तक संपर्क टूट गया.

भगवान दास कहते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतनी बड़ी तबाही कभी नहीं देखी.

'केदारनाथ में बीस हजार लोग'

अपने अनुभव के आधार पर वह कहते हैं कि सैलाब की रात केदारनाथ में कम से कम बीस हजार लोग रहे होंगे.

भगवान दास ने बताया, “इन दिनों केदारनाथ में किसी धर्मशाला में जगह नहीं मिलती. एक-एक बेड पर दो-दो लोगों को सुलाया जाता है. मेरे ख़्याल से उस रात केदारनाथ में कम से कम बीस हजार लोग तो रहे होंगे.”

"इन दिनों केदारनाथ में किसी धर्मशाला में जगह नहीं मिलती. एक-एक बेड पर दो-दो लोगों को सुलाया जाता है. मेरे ख़्याल से उस रात केदारनाथ में कम से कम बीस हजार लोग तो रहे होंगे."

भगवान दास, शिव शंकर टूर ट्रैवल्स

हालांकि वे ये भी कहते हैं कि केदारनाथ से ज़्यादा नुकसान रामबाड़ा में हुआ है.

उन्होंने बताया, “केदारनाथ में कुछ तो दिखाई दे रहा है लेकिन रामबाड़ा में तो सब साफ हो गया है.”

राहत और बचाव कार्य में लगी सेना और प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया है लेकिन इस आपदा के शिकार बने लोगों को लेकर अब भी तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

भगवान दास कहते हैं, “सबकी लाशें तो ढूंढना असंभव है. रामबाड़ा में दस फीट तक मलबा आ गया है. जब तक मिट्टी की खुदाई होगी, तब तक लाशें ही नहीं बचेंगी.”

उम्मीदों पर फिरा पानी

केदारनाथ और चार धाम के रास्ते में आने वाला उत्तराखंड का पूरा इलाका पर्यटन उद्योग के सहारे अपना जीवन यापन करता है.

यहां के हर आदमी की उम्मीद होती है कि वह यात्रा वाले दो महीने की कमाई करके साल भर अपने परिवार को चलाने का खर्च जुटा ले लेकिन इस तबाही ने इन लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

भगवान दास कहते हैं, “आमदनी तो छोड़िए अब तक मुझे दस लाख रुपए का नुकसान हो गया है.”

हालांकि भगवान दास जितने खुशकिस्मत वे हजारों लोग नहीं रहे जिन्हें इस तबाही ने लील लिया.

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