मज़बूत तो बहुत है एमआई-17 मगर..

  • 26 जून 2013
mi helicopter

उत्तराखंड में बचाव कार्य के दौरान भारतीय वायुसेना का एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ

इस दुर्घटना से इतने संकेत तो साफ़ हैं कि घटना अत्यंत दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुई है, लेकिन ये हेलिकॉप्टर ऐसे मिशनों को अंजाम देने के लिए ही बना है.

वायुसेना के प्रवक्ता का कहना है कि रूस निर्मित एमआई-17 हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों की जांच की जा रही है.

जानिए इसके बारे में.

  • ऊंचाई वाले दुर्गम इलाक़ों में रसद और सैनिकों को पहुंचाने के लिए एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टर को रूस से आयात किया गया है.
  • भारत ने रूस को ऐसे 80 हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था जिसकी पहली खेप सितंबर 2011 में भारत पहुंची थी और फरवरी 2012 में इसे औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था.
  • ये एमआई-17 हेलिकॉप्टर का ही उन्नत संस्करण है और मध्यम क्षमता का भार उठाने में सक्षम है. इस पर 30 सशस्त्र सैनिक सवार हो सकते हैं या करीब पांच टन सामान ढोया सकता है.
  • दो इंजन वाले इस हेलिकॉप्टर में मौसम का हाल बताने के लिए विशेष रडार लगा है और साथ ही ऑटोपायलट की भी सुविधा है. इसका कॉकपिट पूरी तरह कांच का बना है.

    mi-17

रात में काम करने में सक्षम

  • इस हेलिकॉप्टर में रात के समय भी पूरी क्षमता से अपने काम को अंजाम देने के लिए आवश्यक उपकरण लगे हैं.
  • 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम इस हेलिकॉप्टर को सैन्य और असैन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. ये हथियार ले जाने और दागने में भी सक्षम है.
  • साल 2004 में आई सुनामी और उसके अगले साल कश्मीर में हुई भारी बर्फबारी में हुए जानमाल के नुकसान के बाद एक ऐसे हेलिकॉप्टर की जरूरत महसूस हुई थी जो दुर्गम इलाक़ों में सुगमता के साथ काम कर सके.
  • इसी के मद्देनजर साल 2008 में भारत ने 80 एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टरों की आपू्र्ति के लिए रूस के साथ 1 अरब 34 करोड़ डॉलर का करार किया था.

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