उत्तराखंड: अब तक 83,000 लोग निकाले गए

  • 24 जून 2013
उत्तराखंड
बचाव कार्य में बुज़ुर्गों और बीमारों को प्राथमिकता दी जा रही है.

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित उत्तराखंड में सोमवार से केदारनाथ और गौरी कुंड के बीच जीवित बचे लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जाएगा.

इस बीच रविवार को आपदा विभाग ने जानकारी दी है कि अब तक 83,000 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाल लिया गया है हालांकि 7,000 लोग अभी भी जगह-जगह फंसे हुए हैं.

राज्य में अभी भी रुक-रुक कर बारिश हो रही है जिससे राहत और बचाव कार्य में बाधा उपस्थित हो रही है.

मौसम विभाग ने सूचित किया है कि अगले एक-दो दिन में फिर से भारी बारिश होने की संभावना है जिससे राहत और बचाव कार्य में बाधा आ सकती है.

उत्तर भारत में समय से पहले ही मॉनसून की बारिश ने भारी तबाही मचाई है जिसमें अब तक लगभग छ सौ लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.

शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा था कि मृतकों की संख्या 1,000 से ज़्यादा हो सकती है.

तालमेल की 'कमी'

रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने में परेशानी हो रही है.

सेना के जवान पहाड़ी इलाकों में फंसे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का कहना है कि पीड़ितों तक खाना पहुंचाना सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है.

बहुत से स्थानीय लोग राहत एजेंसियों पर अपनी अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को ज़्यादा तवज्जो दे रहा है.

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में आई आपदा के लगभग एक सप्ताह बाद कहा है कि युद्धस्तर पर काम किए बग़ैर राहत और बचाव मुमकिन नहीं है और राहत एजेंसियों में तालमेल की कमी से बाधा आ रही है. हालांकि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने तालमेल की कमी से इनकार किया.

उन्होंने कहा है कि वो केंद्र सरकार से और ज्यादा हेलिकॉप्टरों की मांग करेंगे ताकि राहत और बचाव कार्य में और तेज़ी लाई जा सके.

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