उत्तराखंड: सफ़ाई के बाद संवरेगा केदारनाथ मंदिर

  • 23 जून 2013
केदारनाथ

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम केदारनाथ मंदिर का निरीक्षण करेगी. ये टीम डिज़ायन बताएगी और इस टीम और संत समाज की राय के बाद पूरे मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा.

केदारनाथ मंदिर के अलावा मंदिर के परिसर को भी नए सिरे से संवारा जाएगा.

उत्तराखंड बाढ़ पर विशेष

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि केदारनाथ मंदिर के सारे परिसर से लाशें हटाने के बाद उसकी सफ़ाई शुरू की जाएगी. मंदिर के आसपास जितने भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन सभी का पुनर्निर्माण कराया जाएगा.

केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना होनी है. मगर जब तक सफ़ाई और मृतकों का दाह संस्कार नहीं होता, पूजा नहीं की जा सकती. संत समाज की राय लेने के बाद मंदिर समिति इस बारे में जल्दी ही कदम उठाएगी.

प्राकृतिक आपदा के समय मंदिर के रावल (पुजारी) बंगलोर और महाराष्ट्र की यात्रा पर थे और अब वो वापस आ गए हैं.

कहां है केदारनाथ

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि मृतकों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा. संत समाज से अनुरोध किया गया है कि घटना के तेरहवें दिन दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए हरिद्वार में महायज्ञ किया जाएगा.

इससे पहले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने माना कि 1000 से अधिक लोग इस आपदा में मारे गए हो सकते हैं और 22000 लोग अभी भी अलग-अलग जगहों पर फंसे हैं.

बढ़ेगी मृतकों की तादाद!

केदारनाथ
बाढ़ और भूस्खलन से कुछ यूं तबाह हो गया केदारनाथ परिसर

आपदा प्रभावित इलाकों से निकलकर आए यात्रियों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पहले ही आशंका थी कि तबाही का पैमाना देखते हुए मौत का आंकड़ा ज़्यादा हो सकता है.

राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार मरने वालों की संख्या 2000 से 2500 के बीच होगी. जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि हज़ारों लोग इस आपदा के शिकार हुए हैं.

इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित केदारनाथ में ही हज़ारों लोग मौजूद थे और वहां पांव रखने तक की जगह नहीं थी. चार धाम यात्रा के दौरान केदारनाथ में औसतन 13000 लोग हर दिन जाते हैं.

तबाही से पहले कैसा था केदारनाथ का नज़ारा

इस बीच पता चला है कि केंद्रीय मंत्री हरीश रावत भी रूद्रप्रयाग जिले के अगस्त्य मुनि इलाके में फंस गए हैं. वो प्रभावित इलाकों का दौरा करने गए थे.

कल रात से मौसम खराब है और राज्य के कई स्थानों में बारिश और बौछार के साथ-साथ धुंध बनी हुई है, जिससे हेलिकॉप्टर की उड़ान पर असर पड़ रहा है. इसलिए अधिक से अधिक लोगों को सड़क मार्ग से निकालने की कोशिश की जा रही है.

इस बीच गरूड़चट्टी, जंगलचट्टी और जंगल के इलाकों में जिन लोगों का पता चला था, उन्हें निकालने के लिये आपदा प्रबंधन विभाग पर्वतारोहियों की मदद भी ले रहा है.

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