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केदारनाथ मंदिर का प्रवेश द्वार ध्वस्त

 बुधवार, 19 जून, 2013 को 08:58 IST तक के समाचार

क्लिक करें उत्तराखंड में जान-माल की क्षति और तबाही का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है. जैसे–जैसे प्रभावित इलाक़ों से संपर्क क़ायम हो रहा है, राहत और बचाव टीमें वहां पंहुच पा रही हैं, वैसे-वैसे विनाश की दिल दहलाने वाली सूचनाएं मिल रही हैं.

बरसात का क़हर थोड़ा थमा ज़रूर है लेकिन आपदा से हुए विनाश की तस्वीर सामने है. रूद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी के कई इलाक़ों के संपर्क मार्ग, बिजली-पानी की लाइनें और संचार सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं.

यहां बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं. सड़क, मकान और दुकानें बह गई हैं और जान-माल की ऐसी व्यापक क्षति हुई है कि किसी को कुछ पता ही नहीं चल पा रहा है कि कितनी मौतें हुई हैं, कितने घायल हैं और कितने लापता हैं. सबके अपने-अपने आंकड़े और अनुमान हैं.

गढ़वाल के कमिश्नर सुवर्धन ने कहा कि जब तक हम मौक़े पर नहीं पंहुचते हैं कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन मरने वालों की संख्या काफ़ी ज्यादा है. उनके मुताबिक़ मरने वालों की तादाद 200-300 हो सकती है.

तीर्थयात्री फंसे

प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला के अनुसार क्लिक करें चार धाम यात्रा के रास्ते बंद हो जाने के कारण बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमनोत्री और गंगोत्री घूमने आए क़रीब 75 हज़ार तीर्थयात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं.

बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने एक टेलीविज़न चैनल को दिए बयान में कहा है कि पूरी केदारघाटी ध्वस्त हो गई है और वहां एक हज़ार से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि केदारनाथ के रामबाड़ा में सबसे ज्यादा विनाश हुआ है. प्रसिद्ध चार धामों में से एक केदारनाथ मंदिर को भी विनाशकारी बारिश से काफ़ी नुक़सान पंहुचा है.

राज्य के मुख्य सचिव सुभाष कुमार के कार्यालय के मुताबिक़ मंदिर परिसर और उसके आस-पास मलबा ही मलबा बिखरा हुआ है. मुख्य मंदिर तो सुरक्षित है लेकिन मंदिर का प्रवेश मार्ग, उसके आसपास के निर्माण और बाज़ार मलबे में दब गए हैं.

केदारनाथ जाने वाले रास्ते ध्वस्त हो चुके हैं और वहां अब भी कई लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है. यहां तीन पुलिसकर्मी और आईटीबीपी के दो जवानों की भी मौत हो गई है.

तबाही

आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि केदारनाथ में भारी तबाही हुई है और सबसे ज्यादा मौतें भी वहीं हुई होंगी.

18 जून को 10 हेलिकॉप्टर राहत और बचाव में लगे रहे और केंद्र सरकार बुधवार सुबह तक 12 और हेलिकॉप्टर उत्तराखंड सरकार को उपलब्ध करवा देगी. प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को इसके लिए आश्वस्त किया है.

मुख्यमंत्री ने केदारनाथ और घांघरिया से क्लिक करें फंसे यात्रियों को निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल वहां खाने पीने की चीजों के पैकेट, कंबल, प्लास्टिक शीट और दवाईयां पंहुचाई जा रही हैं.

एनडीआरएफ(नेशनल डिजास्टर रिज़र्व फ़ोर्स) के 400 जवान प्रभावित स्थलों की ओर निकल चुके हैं जबकि 100 जवान हरिद्वार में रिज़र्व हैं. राहत टीमों को हेलिकॉप्टर के माध्यम से व कई जगहों पर हेलिकॉप्टर संभव न होने पर पैदल ही भेजा गया है.

राहत कार्य

राहत और बचाव में लगी सेना की टीमों की जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैट ने बताया कि केदारनाथ से बड़ी संख्या में लोगों को निकाल लिया गया है और बचे हुए लोगों को जल्द ही निकाल लिया जाएगा. वहां राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.

इस बीच श्रीनगर-कोटद्वार मार्ग खुला है और वहां से 800 से 1000 गाडि़यां निकाली गई हैं. गोविंदघाट से भी काफ़ी लोगों को निकाला गया है. विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों की टीम रूद्रप्रयाग पहुंचने का प्रयास कर रही है.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार के अनुसार देवप्रयाग से रूद्रप्रयाग तक के रास्ते को खोलने में 2-3 दिन का समय और लगेगा.

अभी भी कई इलाक़े पूरी तरह से कटे हुए हैं और उनसे संपर्क नहीं स्थापित हो पाया है जिससे आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि जान माल की क्षति का आंकड़ा और बढ़ सकता है. लोग डरे और आशंकित हैं कि अब आगे क्या होनेवाला है क्योंकि ये मॉनसून की शुरूआत ही है.

स्थानीय लोगों को एक लंबे समय तक इस आपदा से हुए विनाश को झेलना है और एक सवाल ये भी है कि पहले से ही पिछड़े हुए पहाड़ी इलाक़ों में इन बुनियादी सुविधाओं का पुनर्निर्माण कब और कैसे होगा.

संभव है कि इस आपदा के बाद पर्वतीय इलाक़ों से मैदानों की ओर एक और बड़ा पलायन होगा.

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