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'दिल्ली में बलात्कार की सबसे ज़्यादा घटनाएं'

 शुक्रवार, 14 जून, 2013 को 16:23 IST तक के समाचार
दिल्ली

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार के बाद कई दिनों तक प्रदर्शन हुए थे.

दिल्ली भारत की राजधानी तो है ही लेकिन अगर इसे बलात्कार की राजधानी भी कहा जाए तो शायद ग़लत नहीं होगा. एनसीआरबी यानि कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2012 की वार्षिक रिपोर्ट बहुत हद तक इस बात को साबित कर देती है.

एनसीआरबी की ये वार्षिक रिपोर्ट इसी महीने सार्वजनिक की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 में दिल्ली में लगभग 600 बलात्कार की वारदातें हुईं हैं जबकि दूसरे चार बड़े शहरों में कुल मिलाकर लगभग 500 बलात्कार की घटनाएं सामनें आईं हैं.

पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में एक फ़िज़ियोथेरेपी की छात्रा के साथ चलती बस में हुए क्लिक करें सामूहिक बलात्कार के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध ख़ासकर बलात्कार की घटनाओं पर लोगों की नज़रें पहले की तुलना में अब ज़्यादा रहती हैं.

'दिल्ली सबसे असुरक्षित'

उस घटना के बाद दिल्ली और देश के कई इलाक़ों में कई दिनों तक सरकार विरोधी प्रदर्शन होते रहे थे जिसके कारण सरकार बलात्कार को रोकने के लिए एक नया क्लिक करें क़ानून बनाने के लिए मजबूर हो गई थी.

एनसीआरबी के अनुसार लगभग 75 लाख महिलाओं के शहर दिल्ली में साल 2012 में 585 क्लिक करें बलात्कार की वारदातें हुईं हैं. जबकि मुंबई (232), कोलकाता (68), चेन्नई (94) और बंगलौर (90) में कुल मिलाकर 484 बलात्कार की घटनाएं सामनें आईं हैं.

दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों की जनसंख्या एक करोड़ से ज्यादा है.

शहरों की कैटेगरी में भी दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की सबसे ज़्यादा घटनाएं हुईं हैं.

राम सिंह

दिल्ली बलात्कार के एक अभियुक्त राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी.

एनसीआरबी ने साल 2012 में कुल 53 बड़े शहरों का अध्ययन किया था जिसके अनुसार महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले कुल अपराध में दिल्ली का हिस्सा सबसे अधिकार 14.18 फ़ीसदी था.

साल 2012 में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के कुल 5194 मामले सामने आएं जबकि साल 2011 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ़ कुल 4489 वारदातें हुईं थीं.

पूरे देश की बात की जाए तो साल 2012 में भारत भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ कुल दो लाख 44 हज़ार 270 वारदातें हुईं हैं.

लेकिन जानकारों का कहना है कि भारत में बलात्कार और महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले कई दूसरे अपराधों के कई मामले दर्ज ही नहीं किए जाते हैं और हाल के दिनों में कई शहरों में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की बढ़ती संख्या की एक वजह लोगों में बढ़ती जागरूकता हो सकती है.

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