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'वाजिब है अफ़ग़ानिस्तान की मदद करना'

 मंगलवार, 21 मई, 2013 को 18:50 IST तक के समाचार
अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई भारत की दो दिन की यात्रा पर आए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति क्लिक करें हामिद करज़ई दो दिन के दौरे पर सोमवार को भारत पहुंचे. कयास लगाए जा रहे हैं कि करज़ई भारत से और अधिक सैन्य सहायता की मांग करेंगे.

भारत और क्लिक करें अफ़ग़ानिस्तान के बीच कई विषयों पर कूटनीतिक साझेदारी है जिनमें से एक सुरक्षा का विषय भी है.

अगर हामिद करज़ई भारत से इस साझेदारी के तहत सुरक्षा मामलों पर बात करना चाहें जिसमें भारत से सुरक्षा के क्षेत्र में मदद चाहना शामिल हो, तो ये बिल्कुल वाजिब होगा.

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा समय बहुत नाज़ुक दौर है. वहां अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होना है और क्लिक करें अंतरराष्ट्रीय सेना की वापसी भी होगी. इनका प्रभाव वहां की राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा.

मदद

इस दौरे पर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति भारत से आंतरिक सुरक्षा और सेना के प्रशिक्षण के लिए मदद मांग ले सकते हैं और भारत, जो भी मुनासिब होगा, वो मदद करेगा.

भारत को अफ़ग़ानिस्तान की मदद करनी चाहिए. आज के संदर्भ में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते पूरे क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. आज ही नहीं, बहुत पहले से क्लिक करें अफ़ग़ान सेना के अधिकारी भारत में प्रशिक्षण लेने आते रहे हैं और आज भी हो रही है. इसमें विस्तार भी हो सकता है.

लेकिन वर्ष 2001 में अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान का शासन ख़त्म होने के बाद से भारत के साथ उसके करीबी संबंध क्लिक करें पाकिस्तान की आंखों में खटकते रहे हैं.

भारत और अफ़ग़ानिस्तान के संबंध और भारत-पाकिस्तान संबंध अपनी-अपनी जगह हैं. पाकिस्तान को इन संबंधों के बारे में कोई शक़ नहीं होना चाहिए. भारत और अफ़गा़निस्तान के बीच संबंधों पर अगर पाकिस्तान को ऐतराज़ है तो उस बारे में कोई क्या कर सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय वाणिज्य दूतावासों की मौजूदगी पर भी पाकिस्तान अपनी नाराज़गी जता चुका है.

लेकिन वाणिज्य दूतावास अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक सिद्धांतों के तहत काम कर रहे हैं, अफ़ग़ानिस्तान की सरकार की मंजूरी से ये स्थापित हुए हैं. इसमें किसी और देश की दखलअंदाज़ी से क्या मतलब है.

(पूर्व राजनयिक विवेक काटजू से समीरात्मज मिश्र की बातचीत पर आधारित).

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