'भारत की स्थिति पाकिस्तान से भी बदतर'

  • 7 मई 2013
नवजात शिशु
भारत में करीब 300,000 बच्चों की पैदा होने के 24 घंटे के भीतर मौत हो जाती है

मां बनने के अनुभव के मामले में दुनिया में आज भी बड़ी असमानता पाई जाती है. चैरिटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताज़ा रिपोर्ट में ये बात सामने आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशकों में पूरी दुनिया में हो रहे प्रयासों की वजह से माताओं और शिशुओं की जीवन रक्षा में काफी प्रगति हुई है.

लेकिन आज भी हालात ऐसे हैं कि दस लाख से ज्यादा नवजात दुनिया में आने के पहले दिन ही मौत के मुंह में चले जाते हैं और ग़रीब देशों में माताओं की जान काफ़ी जोख़िम में रहती है.

'सेव द चिल्ड्रन' ने गर्भधारण काल और प्रसव के दौरान मृत्यु, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर और स्कूलों में बिताए साल के आधार पर दुनिया के देशों की रैंकिंग की है.

भारत और पाकिस्तान

चैरिटी संस्था की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माताओं की स्थितियां पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी बदतर हैं.

संस्था ने 186 देशों में माताओं के स्वास्थ्य, बाल मृत्यु दर, शिक्षा और आय के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की है.

इसमें बच्चे पालने में महिलाओं की स्थिति के लिहाज से भारत को 142वें स्थान पर रखा गया है जबकि पाकिस्तान 139वें, बांग्लादेश 136वें और नेपाल 121वें स्थान पर है.

इस सूची में यूरोपीय देश फिनलैंड पहले, स्वीडन दूसरे और नार्वे तीसरे तथा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो सबसे पीछे यानी 186वें नंबर पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब तीन लाख बच्चे पैदा होने के 24 घंटे के भीतर काल के गाल में समा जाते हैं. इस मामले में भारत पहले स्थान पर है और दुनियाभर में नवजात शिशुओं की पहले दिन होने वाली कुल मौतों में 29 प्रतिशत भारत में होती हैं.

अमरीका

शिशू मृत्यु दर के मामले में विकसित देशों में अमरीका पहले स्थान पर है जहां हर साल 11,300 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है.

इतना ही नहीं प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के मामले में भी भारत पहले स्थान पर है. भारत में हर साल 56000 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो जाती है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत ने शानदार आर्थिक विकास किया है लेकिन इसका लाभ हर वर्ग तक नहीं पहुंचा है.”

आश्चर्य की बात ये है कि रिपोर्ट में विकसित देशों में शिशु मृत्यु दर के मामले में अमरीका पहले स्थान पर है. अमरीका में हर साल 11,300 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है.

न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के डॉक्टर इफात हॉस्किंस ने कहा कि अमरीका में शिशु मृत्यु दर का मुख्य कारण दूसरे देशों से होने वाला पलायन है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में नवजात शिशु मृत्यु दर अब भी बहुत ज्यादा है. इस दिशा में अभियान चलाने वालों का कहना है कि बच्चों और माताओं को मदद देकर तथा विकास को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है.