मतदाताओं के हाथ में येदियुरप्पा का भविष्य

  • 5 मई 2013
कर्नाटक
बीएस येदियुरप्पा से भाजपा को नुकसान हो सकता है

कर्नाटक में हो रहे विधान सभा के चुनाव के लिए मतदान शुरू हो चुका है. हालांकि बेंगलुरु के शहरी इलाके में सुबह के वक़्त रुझान थोड़ा कम नज़र आ रहा है मगर ग्रामीण इलाकों से ख़बरें आ रहीं हैं कि बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केन्द्रों के तरफ जा रहे हैं.

शिमोगा में पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा मतदान शुरू होने से आधे घंटे पहले ही अपने मतदान केंद्र पहुँच गए थे. वहां वो दूसरे मतदाताओं के साथ कतार में खड़े दिखे.

अधिकारियों का कहना है कि रविवार होने की वजह से शहरी इलाकों में लोग देर से सो कर उठते हैं इसलिए सुबह के वक़्त रुझान में कमी नज़र आती है.

चुनाव आयोग ने मतदान का समय एक घंटे के लिए बढ़ा दिया है यानी अब सुबह सात बजे से शाम के 6 बजे तक वोट डाले जायेंगे. ऐसा दिन की चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए किया गया है.

ये पहला मौक़ा है जब राज्य के लगभग 1100 मतदान केन्द्रों की निगरानी कैमरे लगाकर की जा रही है.

जागरुकता अभियान

राज्य में 4.35 करोड़ मतदाता हैं और मतदान के लिए 65 हज़ार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इंतज़ाम किया गया है.

वैसे 1971 के बाद से ही कनार्टक में मतदान के प्रतिशत को लेकर चिंताएं जतायीं जाती रहीं, इस बार चुनाव आयोग ने मतदाताओं में जागरूकता फैलाने के लिए भी बड़ा अभियान शुरू किया है.

इसके अलावा बेंगलुरू पोलिटिकल एक्शन कमिटी (बीपेक) नामक संगठन ने भी इसको लेकर बड़ा अभियान चलाया है. इस कमिटी में एन आर नारायणमूर्ति, किरण शॉ मजूमदार के अलावा बेंगलुरू के कॉरर्पोरेट जगत की जानी-मानी हस्तियाँ जैसे टी वी मोहनदास पाई, हरीश बिजूर शामिल हैं.

बीपेक ने लोगों से साफ़ छवि के उम्मीदवारों को चुनने के साथ-साथ चुनाव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील करते हुए पिछले कई महीनों से अभियान चला रखा है.

संगठन ने कुछ उम्मीदवारों को समर्थन करने का ऐलान भी किया है जो विभिन्न दलों से आते हैं मगर मौजूदा राजनीतिक परिवेश में उनका दामन दाग़दार नहीं हुआ है.

किनमें है मुकाबला

कर्नाटक में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस में है.

जो अन्य पार्टियां मैदान में हैं उनमें जेडी(एस) और केजेपी अहम हैं. खास तौर भाजपा से अलग होकर कर्नाटक जन पक्ष (केजीपी) बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर सबकी नजरें होंगी.

कर्नाटक दक्षिण भारत का पहला राज्य है जहां पांच साल पहले भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज कर अपनी सरकार बनाई. लेकिन पार्टी गुटबाजी का बेहद शिकार रही. राज्य सरकार पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे.

विश्लेषकों की राय है कि येदिरप्पा के अलग होने के बाद भारतीय जनता पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

राज्य में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिनमें हलियाल सबसे बड़ा विधान सभा क्षेत्र है.

अहम उम्मीदवार

कांग्रेसः कांग्रेस के जिन उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है उनमें कन्नड फिल्मों की जानी मानी हस्ती एमएच अम्बारीशो दक्षिण कर्णाटक के मंड्या से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जी. परमेश्वरा तुमकुर जिले की कोरातागेरे सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

सदन में विपक्ष के नेता सिद्दारामईय्या मैसूर के वरुण कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा क्षेत्र से लड़ रहे हैं.

केंद्रीय श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र प्रियंक खड़गे गुलबर्गा की चितपुर सीट से लड़ रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टीः मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर हुबली के धारवाड से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केएस इश्वरप्पा शिमोगा से चुनाव मैदान में हैं. गृह मंत्री आर अशोक जो बेंगलुरु के पद्मनाभानगर से भाजपा के उम्मीदवार हैं.

कर्णाटक जन पक्ष (केजेपी): भाजपा के बागी नेता बीएस येदियुरप्पा शिमोगा के शिकारीपुरा से लड़ रहे हैं जबकि सीएम उदासी हावेरी से उम्मीदवार हैं. इनके अलावा शोभा करंदलाजे बेगलुरु के राजाजीनगर से किस्मत आजमा रही हैं.

जनता दल (सेकुलर): पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी दक्षिण कर्णाटक के रमनन ग्राम से चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी पत्नी अनीता चेन्नापटना से जेडीएस के टिकट पर मैदान में उतरी हैं.

इनके अलावा पंजाब से आईं कन्नड़ अभिनेत्री पूजा गांधी उत्तर कर्णाटक के रायचूर से बीएसआर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं हैं.

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