प्रेसीडेंसी में हुई 'गुंडागर्दी' के लिए खुद राज्यपाल की माफ़ी

  • 13 अप्रैल 2013
दिल्ली में ममता बनर्जी के साथ एसएफ़आई कार्यकर्ताओं के धक्का-मुक्की के बाद बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हिंसक प्रदर्शन किए

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में बुधवार को हुई 'गुंडागर्दी' के लिए माफ़ी मांगी है.

शुक्रवार को विश्वविद्यालय के दौरे पर पहुंचे राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि वह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में असफल रहे हैं.

लेकिन साथ ही उन्होनें कहा कि हिंसा के लिए दूसरों को भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.

राज्यपाल ने कहा, “जो हुआ उसके लिए मैं कोलकाता और बंगाल के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों से माफ़ी मांगता हूं. यह अकल्पनीय था....यह कभी नहीं होना चाहिए था.”

नाकाम

उन्होंने कहा, “आप लोग सबसे संभ्रांत और विलक्षण छात्रों का समूह हैं. मैं स्वीकार करता हूं कि राज्यपाल और कुलाधिपति के रूप में मैं आपके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा हूं.”

राज्यपाल के अनुसार मुख्यमंत्री भी इस घटना से दुखी हैं क्योंकि यह उनके लिए भी एक ड्रीम प्रोजेक्ट है.

मंगलवार को दिल्ली में राज्य की मुख्यमंत्री ममता मुखर्जी और वित्त मंत्री अमित मित्रा से एसएफ़आई कार्यकर्ताओं ने धक्कामुक्की की थी.

इसके विरोध में बुधवार को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने राज्य भर में हंगामा किया था. उपद्रवियों ने प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में भी 'गुंडागर्दी' की थी.

उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज में घुस कर बेकर प्रयोगशाला सहित विभिन्न विभागों में तोड़ फोड़ मचाई थी.

कुछ छात्रों की पिटाई और छात्राओं के साथ छेड़खानी भी की गई थी.

टीएमसी पर चुप

विश्वविद्यालय की कुलपति ने कहा था कि उपद्रवी तृणमूल के झंडे लिए हुए थे.

विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, "अभी तक हम मानते थे कि बंगाल लड़कियों और महिलाओं के सबसे सुरक्षित जगह है. उस संस्कृति को क्या हुआ."

उन्होंने कहा किसी राजनीतिक दल पर आरोप नहीं लगाना चाहता और वे बस यही कहना चाहते हैं कि यह नहीं होना चाहिए था.

राज्यपाल बुधवार की हिंसा में टीएमसी की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल को भी टाल गए.

उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले वामदल जांच रिपोर्ट का इंतज़ार करें.

हालांकि उन्होंने कहा कि दिल्ली में राज्य की मुख्यमंत्री पर हमला किया गया लेकिन उसके लिए ज़िम्मेदार दल ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है.