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राजनीति से लेकर विदेश नीति, मोदी के पास है सभी का इलाज

 मंगलवार, 9 अप्रैल, 2013 को 14:52 IST तक के समाचार
नरेंद्र मोदी

मोदी ने गुजरात का गुणगान करते हुए सरकारी प्रणाली की आलोचना की.

सोमवार को दिल्ली में दो भाषणों के बाद मंगलवार को क्लिक करें नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में व्यापारियों के एक और संघ के सामने गुजरात में अपने शासनकाल और वहाँ लागू सरकारी नीतियों का क्लिक करें गुणगान किया, हालाँकि गुजरात में विपक्ष उनकी विकास की बातों को कोरा झूठ बता रहा है.

एक तरफ जहाँ मीडिया मोदी के भाषणों की हर लाइन का मतलब तलाश कर रहा है, नरेंद्र मोदी ने खुद को ‘गैर-राजनीतिक’ बताया और बेहद नर्म अंदाज में कहा कि वो कोलकाता बंगाल से गुजरात की तुलना करने नहीं, बल्कि बंगाल में सीखने आए हैं ताकि उसका क्रियान्वयन गुजरात में किया जा सके.

क्लिक करें मोदी ने कहा, “मैं मीडिया से कहूँगा कि वो ये स्वीकारें कि मैं कोलकाता या बंगाल में नहीं बोल रहा हूँ. वो ये मान लें कि मैं अहमदाबाद में बोल रहा हूँ ताकि किसी विवाद से बचा जा सके.”

ममता बैनर्जी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए मोदी ने कहा, “बंगाल में पिछले 32 सालों में कई गड्ढे हुए हैं और इन गड्ढों को भरना भारी काम होगा. इस काम को अभी किया जा रहा है. मैं मानता हूँ कि बंगाल में सही दिशा में काम किया जा रहा है लेकिन इसमें कई साल लगेंगे.”

उन्होंने एक बार फिर गैर-यूपीए शासित प्रदेशों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया.

क्लिक करें मोदी ने कहा, “जब राज्य अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो सारा श्रेय केंद्र सरकारों को दिया जाता है लेकिन जब कोई समस्या होती है तो जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर सौंप दी जाती है. देश की अखंडता के लिए ये ठीक नहीं है.”

गुजरात में लागू नीतियों की भरपूर तारीफ करते हुए मोदी ने कहा कि गुजरात ही शायद ऐसा प्रदेश है जहाँ मवेशियों का कैटरैक्ट ऑपरेशन किया जाता है, और उनके दातों का इलाज किया जाता है.

पाकिस्तान पर मोदी ने कहा कि एक तरफ भारतीय सैनिकों का गला काटा जा रहा है और दूसरी ओर पाकिस्तान के लोगों के सम्मान में भोज आयोजित किया जा रहा है.

मोदी ने कहा, “उनका कहना है कि ये हमारी सभ्यता है. कौन सी सभ्यता?”

इतालवी सैनिकों पर चल रहे विवाद पर मोदी ने कहा, “भारत सरकार ने दो इतालवी सैनिकों को वोट डालने के लिए अपने देश वापस जाने दिया. यहाँ भारत में विचाराधीन कैदियों को अपनी माँ के अंतिम संस्कार में भी शामिल होने की इजाज़त नहीं दी जाती.”

मोदी ने कहा कि विदेश नीति में भारतीय सरोकारों को सर्वोपरि रखना चाहिए.

उन्होंने कहा, “आज दुनिया में रिश्तों का आधार व्यापार और वाणिज्य है. ये वैश्विक व्यापार का दौर है.”

क्लिक करें (क्या मोदी की मंच कला राहुल से बेहतर है?)

हिटलर से तुलना

'झूठा नंबर 1'

"आधा सच और झूठ फैलाने में मोदी नंबर वन हैं"

शक्तिसिंह गोहिल

उधर गुजरात कांग्रेस ने क्लिक करें मोदी की विकास के दावों को झूठ करार दिया है.

मोदी की तुलना हिटलर से करते हुए कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि नरेंद्र मोदी श्रेय लेने के लिए बार-बार झूठ बोल रहे हैं.

गोहिल ने मोदी के इस आरोप को गलत बताया कि गुजरात में राज्यपाल के कारण महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने वाला बिल अधर में लटका हुआ है.

गोहिल ने कहा, “दरअसल, राज्यपाल ने 5 अप्रैल 2010 को भेजे अपने पत्र में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की तारीफ की थी, और इसे एक सराहनीय कदम बताया था. लेकिन उन्होंने इस बिल के साथ अनिवार्य वोटिंग को जोड़े जाने पर आपत्ति उठाई थी क्योंकि भारतीय चुनाव आयोग ने भी इस पर आपत्ति उठाई है.”

गोहिल के अनुसार राज्यपाल चाहती थीं कि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाना वाला बिल जल्दी प्रभाव में आए.

गोहिल के अनुसार मोदी का लिज्जत पापड़, इंदुबेन खाखरावाला, जसुबेन पिज्जावाला पर श्रेय लेना महज झूठ का पुलिंदा है.

सोमवार को उद्योगों के समूह फिक्की कि महिला उद्यमियों के समक्ष भाषण में मोदी ने गुजरात की सफलता का जिक्र करते हुए इन महिलाओं का जिक्र किया था.

गोहिल ने कहा, "ये सभी बातें मोदी के राजनीतिक जन्म से पहले की है. लिज्जत का जन्म भुवनेश्वर में हुआ. जसुबेन पिज्जा की शुरुआत एक ऐसी महिला ने की थी जो पुणे से आई थीं."

गोहिल ने कहा कि अगर मोदी 1959 में स्थापित लिज्जत पापड़ का श्रेय लेना चाहते हैं तो उन्हें गुजरात की लड़कियों में कुपोषण और पुरुष और महिलाओं के अत्यंत खराब लिंग अनुपात की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

गोहिल के अनुसार अगर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को महिलाओं की इतनी चिंता है तो उन्हें जागृति हारेन पांड्या और उन महिलाओं के परिवारों के पास जाने का वक्त क्यों नहीं मिला जिन्होंने एक पूर्व भाजपा सांसद और दो भाजपा काउंसिलर के कथित उत्पीड़न के कारण खुद को आग लगा ली.

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