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फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में तीन पुलिसवालों को फांसी

 शुक्रवार, 5 अप्रैल, 2013 को 16:44 IST तक के समाचार
उत्तर प्रदेश पुलिस

उत्तर प्रदेश पुलिस पर पहले भी फ़र्जी मुठभेड़ के आरोप लग चुके हैं

लखनऊ में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में तीन पुलिस अधिकारियों को फांसी और पांच अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि ये मामला पुलिस उपाधीक्षक रैंक के अधिकारी केपी सिंह से जुड़ा है जिनकी मार्च 1982 में गोंडा ज़िले के माधोपुर गांव में मौत हो गई थी.

पुलिस का दावा था कि केपी सिंह गांव में छिपे डकैतों के साथ क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे. लेकिन उनकी पत्नी का कहना था कि उनके पति को एक जूनियर अधिकारी ने फर्जी मुठभेड़ में मारा था.

सीबीआई ने बाद में इस मामले की जांच की और दावा किया कि सिंह को उनके जूनियर आरबी सरोज ने मारा था. सरोज सहित तीन अभियुक्तों को अदालत ने फांसी की सुनाई है.

साज़िश

सीबीआई ने साथ कहा कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ दिखाने के लिए पुलिस वालों ने 12 गांववालों को घर से निकालकर उन्हें गोली मार दी थी.

फांसी की सजा पाने वालों में सरोज के अलावा रामनायक पांडे और कांस्टेबल राम करण शामिल हैं. सरोज उस समय थानाध्यक्ष थे.

रामनायक पांडे जौनपुर में सब इंस्पेक्टर हैं.

अदालत ने 29 मार्च को इन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया था.

कुल 19 पुलिसकर्मियों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया था जिनमें से 10 की मौत हो चुकी है जबकि एक को अदालत ने बरी कर दिया था.

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