BBC navigation

विशेष अदालत में आंतकी मामलों की सुनवाई!

 रविवार, 24 मार्च, 2013 को 12:58 IST तक के समाचार
sushil shinde

गृह मंत्री ने कहा कि निर्दोष लोगों को हिरासत में लेने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी

'आतंक' के आरोपों की वजह से हाल में कई मुसलमान युवकों की हो रही गिरफ्तारियों के बीच भारत के गृह मंत्रालय ने आतंकी मामलों की शीघ्र जांच के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है.

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर ‘जानबूझकर’ निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया जाता है तो इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की जाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान ख़ान को एक पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी.

पत्र में शिंदे ने कहा कि गृह मंत्रालय पुरज़ोर तरीक़े से विशेष न्यायालय के प्रस्ताव का समर्थन करता है, जिससे शीघ्र जांच मुमकिन होगी.

गंभीर अपराध

उन्होंने कहा, “मेरा भी यह मानना है कि निर्दोष लोगों को जान-बूझकर गिरफ्तार करना और हिरासत में रखना वास्तव में एक गंभीर अपराध है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ऐसे सभी मामलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.”

शिंदे ने शुक्रवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान ख़ान को लिखे एक पत्र में कहा, “मैं आपको आश्वस्त कराना चाहता हूं कि ऐसा क़दम ज़रूर उठाया जाएगा.”

रहमान ख़ान ने इसी साल छह फ़रवरी को गृहमंत्री को लिखे एक पत्र में मुसलमानों और इनसे जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ हुई अपनी बैठक का हवाला देते हुए, 'आतंक' के मामलों में देश के विभिन्न भागों में मुस्लिम युवकों की कथित ग़लत गिरफ्तारियों पर चिंता जताई थी.

गृहमंत्री ने इसी पत्र का जवाब देते हुए विशेष अदालत के प्रस्ताव का समर्थन किया है.

नियमों का दुरुपयोग

मुस्लिम संस्थाओं ने भी यह चिंता व्यक्त की है कि "कठोर" ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम(यूएपीए) के प्रावधानों का दुरुपयोग अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ किया जा सकता है.

"भले ही कानून व्यवस्था राज्य का विषय है लेकिन अगर ऐसे किसी भी मामले की जानकारी मिलती है जिसमें निर्दोष लोगों पर आरोप लगे हैं तो हम उन मामलों पर गौर करेंगे"

सुशील कुमार शिंदे, गृह मंत्री

इसी चिंता को ज़ाहिर करते हुए ख़ान ने विशेष अदालतों की स्थापना करने का प्रस्ताव दिया है ताकि सभी आतंकी मामलों की त्वरित जांच सुनिश्चित हो सके.

ख़ान ने उन युवकों को मुआवज़ा देने की भी बात कही जिन्हें गिरफ़्तार किया गया था और बाद में जब अदालत ने यह पाया कि वे उन मामलों में शामिल नहीं थे तब उन्हें छोड़ दिया गया.

इस बाबत राष्ट्रीय मुस्लिम संस्थाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने दो फ़रवरी को ख़ान से मुलाकात की.

शनिवार को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय संपादकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए रहमान ख़ान ने कहा कि इस मामले में गृह मंत्रालय ने अपना सकारात्मक विचार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, “हम इसका अनुसरण करेंगे.”

अपने पत्र में शिंदे ने ख़ान को यह आश्वासन दिया कि भले ही क़ानून व्यवस्था राज्य का विषय है लेकिन अगर उन्हें ऐसे किसी भी मामले की जानकारी मिलती है जिसमें निर्दोष लोगों पर आरोप लगे हैं तो वे उन मामलों पर ग़ौर करेंगे.

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.