मुंबई धमाका आईएसआई की ट्रेनिंग का नतीजा था: सुप्रीम कोर्ट

  • 21 मार्च 2013
सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल)
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने धमाकों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

भारत की सबसे बड़ी अदालत ने साल 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के अब्दुल रज़ाक मेमन को छोड़कर बाक़ी सभी 10 मुजरिमों की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया है.

मुंबई में अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद एक के बाद एक धमाके हुए थे जिसमें 257 लोग मारे गए थे जबकि 700 से ज़्यादा ज़ख्मी थे.

( 1993 के मुंबई धमाके: कब, क्या हुआ था)

अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने कहा कि, "पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई ने गुनाहगारों को ट्रेनिंग मुहैया करवाई जिसका नतीजा मुंबई धमाका था."

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत की व्यावसायिक राजधानी को निशाना बनाने की साजिश दाउद इब्राहिम ने टाईगर मेमन के साथ मिलकर तैयार की और इसे पाकिस्तानी अधिकारियों की मदद से अंजाम दिया गया.

दिशानिर्देशों की अनदेखी

संजय दत्त डेढ़ साल की जेल की सज़ा पहले ही काट चुके हैं

भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को पाकिस्तान ने 'ग्रीन चैनेल की फैसेलिटी' मुहैया करवाई थी.

अदालत का कहना था कि ये लोग दुबई के रास्ते पाकिस्तान गए और ट्रेनिंग हासिल करने के बाद आईएसआई उन्हें इस्लामाबाद ले गई जिसमें इमीग्रेशन से जुड़े तमाम गाईडलाइन्स को नज़रअंदाज किया गया.

(जिस एके-56 ने बदल दी संजय दत्त की ज़िंदगी!)

मुंबई धमाकों के समय से ही जुड़े एक दूसरे मामले में अदालत ने फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त की क़ैद की सज़ा को बरक़रार रखा, हालांकि उनकी कुल सज़ा को छह साल से कम कर पांच कर दिया गया है.

दस अन्य अभियुक्तों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया गया है. 20 दोषियों में से 17 अभियुक्तों की उम्रकैद को बरकरार परखा गया है.

एक दोषी की सज़ा को 10 साल में तब्दील कर दिया गया है. एक दोषी की कैद में ही मृत्यु हो चुकी है. एक दोषी की सज़ा को पूरा मान लिया गया है.

'सज़ा कम करने की वजह'

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि सज़ा कम करने का फ़ैसला दोषियों के गरीब और अनपढ़ होने की वजह से किया गया है.

याकूब मेनन के मामले में कोर्ट ने कहा कि फ़रार अभियुक्तों के बाद वही इस मामले का सबसे बड़ा दोषी है.

मुंबई धमाके के मामले में 179 आरोपियों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी. सीबीआई ने कोर्ट के 48 लोगों को रिहा किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील की थी.

संजय दत्ते के वकील सतीश मानशिंदे का कहना है कि वो कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि पांच साल की सज़ा में से डेढ़ साल संजय जेल में काट चुके हैं, बाकी साढ़े तीन उन्हें जेल में काटने होंगे.

मानशिंदे ने कहा, “संजय दत्त से हमारी कल शाम को भी बात हुई है. हमने उन्हें समझाया है कि कोर्ट के फ़ैसले को मानना होगा, चाहे वो जो भी हो.”

कोर्ट ने संजय दत्त को सरेंडर करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया है.

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