कैसा था आपका पहला मोबाइल फोन

  • 19 मार्च 2013

भारत में मोबाइल फोन को एक दशक से अधिक समय बीत चुका है और अधिकतर लोगों ने अपने मोबाइल बदले हैं लेकिन कई लोगों के मन में अभी भी अपने पुराने मोबाइल की याद ताज़ा है.

बीबीसी हिंदी ने अपने फेसबुक पन्ने पर लोगों से जब इस बारे में पूछा तो कई लोगों ने टिप्पणियां की.

राजेश ओझा कहते हैं कि उनका पहला फोन नोकिया 1108 था लेकिन लेकिन अब वो मोबाइल नहीं है, इसलिए हमें वो फोटो नहीं भेज पा रहे हैं.

वो कहते हैं, ‘‘कितना बढि़या बैटरी बैक-अप था, कितनी स्‍पष्‍ट आवाज आती थी, हालांकि आज स्‍मार्टफोन यूज कर रहा हूं, लेकिन अभी भी उसकी कमी भुला नहीं पाता.मुझे अगर कहीं से वह सेट मिल जाये तो फिर से उसी का इस्‍तेमाल करना चाहूंगा.’’

उर्फी रिज़वी का पहला मोबाइल रिलायंस का था जो उन्होंने 2003 में खरीदा था. वो रिलायंस के दीवाने हुए और आज भी रिलायंस का फोन ही इस्तेमाल करते हैं.

रिशी कविजी का पहला मोबाइल गुम हो गया और बाकी कुछ मोबाइल दुकानदारों के पास जीवन और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनका पहला फोन नोकिया 3110 था. वो कहते हैं कि अब यादें ही बची हैं फोन नहीं बचा.

वीरेंद्र पांडे ने अपनी स्कॉलरशिप और ट्यूशन के पैसे से पहला फोन खरीदा था नोकिया 1208, वो भी 2008 में. वो कहते हैं कि अब उनके पास लैपटॉप और स्मार्टफोन है लेकिन पहला फोन उनकी मां इस्तेमाल करती हैं.

भारत में मोबाइल का बाज़ार बदला तो है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2000 में भारत में करीब 19 लाख मोबाइल कनेक्शन थे जबकि आज करीब 92 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं पूरे देश में.

बदलता स्मार्टफोन मार्केट

लोगों में मोबाइल के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ी है तो साथ ही फीचर फोन बदल कर स्मार्टफोन खरीदने का प्रचलन भी बढ़ा है.

वैसे सचिन कुमार सिंह अभी भी पहला फोन ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि ये उनके लिए ख़ास है और ये नोकिया 1100 है.

कुछ ऐसा ही देशबंधु स्वामी के साथ भी है जिनका पहला फोन नोकिया 2600 था. वो कहते हैं कि ये नोकिया का सबसे रफ एंड टफ फोन था और कलर मोबाईल का उनका सपना पूरा हुआ था.

हिमांशु दूबे कहते हैं कि उन्हें अपना पहला फोन अपने भाई से गिफ्ट में मिला था और उसकी खुशी किसी नए फोन खरीदने से कहीं अधिक ही थी.

ज़ाहिर है कि बहुत कम लोग हैं जो अब अपना पहला फोन इस्तेमाल कर रहे हैं. नए फोन आए तो पुराने फोन खत्म होने लगे.

एक ज़माने में जहां नोकिया का बोलबाला था वो जगह अब सैमसंग और एप्पल ले रहे हैं.

इंटरनेशनल डाटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) दुनिया भर में मोबाइल के आकड़े जुटाती है. कंपनी के अनुसार वर्ष 2005 में भारत में 32 प्रतिशत लोगों के पास नोकिया के फोन थे जबकि मोटोरोला का 17.7 प्रतिशत पर कब्ज़ा था. सैमसंग 12.5 प्रतिशत और एलजी 6.7 प्रतिशत.

हालांकि ये आंकड़ा 2013 तक बिल्कुल बदल चुका है.अब अधिकतर लोगों के पास स्मार्टफोन है. आईडीसी के आकड़ों की मानें तो इस समय स्मार्टफोन बाज़ार में सैमसंग का दबदबा है और 38.8 प्रतिशत लोगों के पास सैमसंग के फोन हैं. दूसरे नंबर पर भारत में एप्पल है जिसका मार्केट शेयर 15.5 प्रतिशत है.

स्मार्टफोन बाज़ार में नोकिया पिछड़ कर 7.3 प्रतिशत पर जा चुका है.

यूं तो एप्पल ने दुनिया भर में धूम मचा रखी है लेकिन भारतीय बाज़ार में उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी है जिसके कई कारण हैं. कीमत से लेकर सॉफ्टवेयर तक क्योंकि भारत में एप्पल के सॉफ्टवेयरों की पूछ कम है.

स्मार्टफोन बाज़ार में सबसे मज़बूत पक़ड़ एंड्रॉयड ने बनाई है. पिछले कुछ महीने गूगल का एंड्रॉयड सबसे तेज़ी से उभरता ऑपरेटिंग सिस्टम बना है.

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यही नहीं नोकिया के ऐप अभी भी भारत में काफी लोकप्रिय हैं.

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