खालिस्तानियों के लौटने की चाह लेकिन...

  • 16 मार्च 2013

जसवंत सिंह पेशे से ठेकेदार हैं, 66 वर्षीय अलगाववादी नेता पिछले 31 साल से लंदन में रह रहे हैं. पंजाब में बिताया बचपन उन्हें एक बार फिर अपनी ओर खींच रहा है लेकिन ब्रितानी नागरिक जसवंत सिंह की वीज़ा लेने की कई कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं.

जसवंत सिंह कहते हैं, "मेरा घर-बार और प्रॉर्पटी वहां पर है, रिश्तेदार भी हैं. और साथ ही मैं दरबार साहिब के दर्शन भी करना चाहता हूं."

बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक दुनिया भर में ऐसे करीब 160 सिख अलगाववादी हैं जिनका नाम एक ब्लैकलिस्ट में शामिल है. इनमें से अधिकतर कनाडा, अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस में बसे हुए हैं.

पंजाब सरकार की सिफ़ारिश पर इस लिस्ट में कई बार नाम जोड़े या हटाए गए हैं.

ब्लैकलिस्ट

इस सूची में कनाडा में कनिष्का विमान में धमाका करने के आरोपियों से लेकर, खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाने वालों के नाम तक शामिल हैं.

यह सिर्फ़ भारत की बात नहीं, हर देश की सरकार ऐसे लोगों की सूची बनाती है जिन्हें 'एंटी नेशनल' माना जाता है.

जसवंत सिंह की ही तरह 65 वर्षीय परमिंदर सिंह बल इन दिनों लंदन के पास एक डाकघर चलाते हैं, खुद को गर्व के साथ जरनैल सिंह भिंडरावाले नज़दीकी बताने वाले बल अब भी खालिस्तान की मांग को लेकर इंग्लैंड में प्रदर्शन आयोजित करते रहते हैं. उनकी नज़र में ये प्रतिबंध सियासी फ़ैसला है.

बल कहते हैं, " ये तो हिंदुस्तान सरकार की ही पॉलिसी है लेकिन हमें ये शक ज़रुर है कि इसमें पंजाबी की अकाली दल सरकार का हाथ है."

लेकिन शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता विरसा सिंह बलटोहा इस आरोप को ख़ारिज करते हैं.

बलटोहा ने बीबीसी को बताया, "मैं तो ये आरोप सुनकर हैरान हूं. हम तो चाहते हैं कि केंद्र सरकार ब्लैकलिस्टेड भाइयों को इस सूची से हटाएं ताकि वो अपने देश लौट सकें. उनके लौटने की सबसे ज़्यादा ख़ुशी हमें ही होगी. उनके आने से पंजाब का माहौल अच्छा ही होगा."

'अवाम की आवाज़ नहीं'

लेकिन क्या ऐसे लोगों पंजाब लौटने देना चाहिए जिनका एजेंडा अलग देश की मांग करना है. पंजाब में सिख चरमपंथी आंदोलन के दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे कंवर पाल सिंह गिल कहते हैं कि ऐसे लोगों के लौटने पर कोई बंदिश नहीं है लेकिन इसमें एक पेंच है.

परमिंदर सिंह बल
परमिंदर सिंह बल इंग्लैंड में डाकघर चलाते हैं. उन्हें कभी ब्लैकलिस्ट हटा दिया जाता है तो कभी वापस शामिल कर लिया जाता है.

गिल ने कहा, "ये लिस्ट उन लोगों की है जिन्होंने पासपोर्ट से संबंधित धाराओं का उल्लंघन किया है. वैसे भी भारतीय सिख समुदाय ने इन लोगों और इनके मंसबूो को बहुत पहले ही निरस्त कर दिया था. विदेशों में रह रहे सिख पहले घोर समर्थक थे लेकिन धीरे-धीरे वो भी इस विचार तो तज देंगे."

ब्रिटेन में खालिस्तानी नोट चलाने वाले जगजीत सिंह चौहान और वासन सिंह ज़फ़रवाल जैसे कई बड़े अलगाववादियों को भारत आने की अनुमति पहले ही दी चुकी है जिससे उन जैसे दूसरे लोगों में भी पंजाब लौटने की आस जगी है. जसवंत सिहं ठेकेदार का कहना है वे एक राजनीतिक नेता हैं, कोई आतंकवादी नहीं.

ठेकेदार ने कहा कि वे शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन चलाने के हिमायती हैं.

अलग ख़ालिस्तान बनाने के लिए हुए आंदोलन को ठंडा पड़े दो दशक बीत चुके हैं. इस बीच आंदोलन के नेताओं की उम्र ढल चुकी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या बल और ठेकेदार जैसे लोग अब भी भारत के लिए ख़तरा हैं या फिर उन पर लगा प्रतिबंध एक राजनीतिक फ़ैसला है?

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