क्यों मोदी को नहीं पसंद करता अमरीका?

  • 4 मार्च 2013
मोदी
जब आर्थिक कारण नीति निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाने लगी है तो क्या अमरीका नीति नहीं बदलेगा?

जब यह खबर आई कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका में व्हार्टन इंडिया इकॉनोमिक फोरम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधन करने वाले हैं तो चर्चा होने लगी कि क्या अगला कदम अमरीका का वीज़ा हो सकता है.

लेकिन उनका भाषण रद्द होने की खबर ने ऐसे कयासों को खत्म कर दिया. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि अमरीका मोदी के प्रति शायद नरम नहीं पड़ा है.

हालांकि पिछले दिनों ब्रिटेन के उच्चायुक्त और यूरोपीय संघ के अन्य प्रतिनिधियों की मोदी से मुलाकात से ऐसे संकेत मिलने लगे थे कि शायद पश्चिमी देशों ने उनसे दूरी बनाए रखने की अपनी नीति बदल ली है.

ऐसा माना गया कि शायद इसके कारण आर्थिक आधार हो सकते हैं जो आजकल नीतियां तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

लेकिन अगर ऐसा है भी तो अमरीका की नीति में फिलहाल कोई बदलाव नज़र नहीं आता है.

क्यों हुआ रद्द

मोदी के भाषण को रद्द करने के फैसले के बारे में फोरम के कहा, "हम मानते हैं कि (उनके संबोधन को रद्द करने का) ये फैसला बहुत से भागीदारों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए एक उचित कदम है."

दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार भरत भूषण कहते हैं, ''व्हार्टन इंडिया इकॉनोमिक फोरम का आयोजन छात्र करते हैं. बाकी छात्रों और प्रोफेसरों ने इसका विरोध किया है. लेकिन अगर विरोध नहीं करते तो भी कोई गारंटी नहीं थी कि अमरीका उन्हें वीज़ा देता.''

लेकिन जब ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की सोच बदली है तो अमरीका की क्यों नहीं?

भरत भूषण कहते हैं, ''ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने उन्हें वीज़ा नहीं दिया है. और अगर वो देते भी तो मोदी वहां जाते या नहीं, यह कहना मुश्किल है कि कहीं उन्हें गिरफ्तार न कर लिया जाए. आपको याद होगा कि चिली के (जनरल ऑगस्तो) पिनोशे ऐसे ही गिरफ्तार हुए थे.''

मोदी के बारे में उनका कहना है, ''जब 2000 से अधिक लोगों का कत्ल हुआ तब वो मुख्यमंत्री थे और वो इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेते. बहुत सारे लोगों का मानना है कि उन्होंने इसमें अनदेखी की थी. इन लोगों का मानना है कि इसके लिए उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए.''

छवि और विकास

''अपनी छवि सुधारने के लिए वो विकास की बात करते हैं. लेकिन अयोध्या को 20 साल हो गए हैं और आज तक आडवाणी की छवि ठीक नहीं हुई. अयोध्या के बाद वे मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार पर भी जा कर आ गए और जो लिखना है लिख दिया."

लेकिन जब आर्थिक कारण नीति निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाने लगी है तो क्या अमरीका नीति नहीं बदलेगा?

भारत भूषण कहते हैं, ''मैं कह नहीं सकता भविष्य में ऐसा होगा या नहीं लेकिन फिलहाल तो ऐसा नज़र नहीं आ रहा.''

अमरीका का रुख

वे कहते हैं, ''जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की होने वाले बैठक में अमरीका श्रीलंका के खिलाफ प्रस्ताव ला रहा है कि कैसे उसने निर्दोष लोगों को मारा था. आप सोचते हैं कि 2000 लोगों का सर कलम कर दिया जाएगा और सारी दुनिया चुप रहेगी? वो ज़माने गए.''

ब्रिटेन के उच्चायुक्त के उनसे मिलने को भी वे कोई बड़ी बात नहीं मानते. वे कहते हैं, ''ब्रिटेन के उच्चायुक्त उन्हें मिले ज़रूर लेकिन उन्होंने यह तो नहीं कहा कि वे उन्हें वीज़ा देंगे.

इसका तर्क देते हुए वे कहते हैं, ''हमारे राजनयिक पाकिस्तान के बड़े बड़े नेताओं से मिलते हैं. लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं के कि उनसे सहमत है और जो विवादित मुद्दे हैं वो दरी के नीचे छिपा दिए जाएंगे.''