बीजेपी बैठक: 'सब मोदी का गुणगान करने लगेंगे'

  • 3 मार्च 2013
प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी के नाम पर सहमति संभव

नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में कद्दावर नेता के तौर पर अपनी जगह मज़बूत करते जा रहे हैं.

मुंबई में जब पिछली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी और नरेंद्र मोदी के कहने पर संजय जोशी को बाहर निकाला गया था, तभी ये तय हो गया था कि आने वाले दिनों में उनका रुतबा बढ़ने ही वाला है.

भारतीय जनता पार्टी शायद अब नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान का जिम्मा सौंपे. प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा शायद अभी ना हो क्योंकि सहयोगी दलों के नजरिए को भी देखना होगा.

मसलन जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार जैसे लोग हैं जो ये कह चुके हैं बिना बातचीत किए आप प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं करें.

वैसे नीतीश कुमार अपनी बात पर अड़े रहेंगे ये भी नहीं कहा जा सकता. क्योंकि जब गुजरात में 2002 में दंगे हुए थे, तब नीतीश कुमार एनडीए की केंद्र सरकार में मंत्री बने हुए थे, वे बाहर निकलकर नहीं गए. उस वक्त तो नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला भी एनडीए सरकार में शामिल थे और तेलगूदेश के चंद्रबाबू नायडू भी सरकार में बने रहे.

पावर का चस्का

दरअसल पावर का कुछ और ही चस्का होता है. जब पावर सामने नजर आएगा तब नीतीश कुमार क्या करेंगे ये नहीं कहा जा सकता.

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की सोच ये है कि वह लोकसभा चुनाव में ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीते. पार्टी की सोच ये है कि वे सीटों के मामले में अगर कांग्रेस से आगे निकल गई तो फिर दूसरे सहयोगी दल रो-धो कर साथ आने को मज़बूर हो ही जाएंगे.

मोदी की मुश्किल

हालांकि नरेंद्र मोदी के सामने पार्टी के अंदर मुश्किलें बनी हुई हैं. भारतीय जनता पार्टी का जो राष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व है, जिसमें मैं सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, राजनाथ सिंह, लाल कृष्ण आडवाणी, वैंकया नायडू और अनंत कुमार को गिनती हूं.

अगर इन लोगों से अलग अलग पूछा जाए तो कोई भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर नरेंद्र मोदी के नाम पर सहमति के लिए तैयार नहीं होगा. क्योंकि सबको मालूम है कि इससे उनकी अपनी अहमियत कम हो जाएगी.

नरेंद्र मोदी एक टीम आदमी नहीं है. गुजरात में आपने किसी और का नाम नहीं सुना होगा. जो वहां पांच-छह दफे सांसद बन कर आ रहे थे, उन्हें मोदी ने टिकट देना ही बंद कर दिया. सबको निकालकर अलग कर दिया.

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के लोग समझते हैं कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो उनका अपना फ्यूचर क्या होगा.

लेकिन इन सबके बावजूद अगर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ संकेत दे दे तो सब नरेंद्र मोदी का गुनगान करने लगेंगे.

( नीना व्यास से अशोक कुमार की बातचीत पर आधारित)

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