असम: शिकारियों ने मारे 13 गैंडे

  • 2 मार्च 2013
गैंडा
असम में पिछले दो महीने में एक सींग वाले गैंडे के शिकार की घटना बढ़ी है (फा़इल फोटो)

असम में शिकारियों ने पिछले दो महीने में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे एक सींग वाले 13 गैंडों को मार दिया है.

शुक्रवार को अधिकारियों ने कहा कि इस घटना के मद्देनज़र हाल के दिनों में शिकार की बढ़ती तादाद को लेकर चिंता बढ़ गई है.

शिकारियों के ताज़ा हमले की घटना असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास हुई है जहां दुनिया के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडे रहते हैं. यहां भारी हथियारों से लैस शिकारियों ने इन विशालकाय शाकाहारी गैंडों को गोली मार दी.

काजीरंगा उद्यान के वार्डन एन.के. वासु का कहना है कि पिछले दो महीनों में शिकारियों ने 13 गैंडे को मारा गिराया गया और उनके सींग को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में ही निकाल लिया.

जंगल में गश्ती लगाने वाले गार्डों ने भी गोलियों की आवाज सुनी. वन सुरक्षाकर्मियों को गोलियों से छलनी हुए गैंडे का शरीर मिला जिनके सींग हटा दिए गए थे. फिलहाल अगराटोली तथा कोहरा की पूर्वी पर्वतमाला की सीमा के नज़दीक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया.

तलाशी अभियान

इस इलाके में खोजी कुत्तों के जरिए तलाशी अभियान जारी है ताकि शिकारियों को पकड़ा जा सके. वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि एक गैंडे के सींग की क़ीमत सोने की तरह मूल्यवान है और अपने मूल्य वजह से ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगठित आपराधिक गिरोहों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

चीन इसके लिए मुख्य बाज़ार है जहां इसका इस्तेमाल दवाओं और गहनों के लिए किया जाता है. वहीं वियतनाम में कई लोगों का मानना है कि गैंडे के सींग का इस्तेमाल कर कैंसर का इलाज हो सकता है और इसमें कामोत्तेजना बढ़ाने के गुण हैं.

असम में एक वन्यजीव संरक्षणकर्ता अपूर्वा दास का कहना है, “हम हर दूसरे दिन इस तरह गैंडे को मरते हुए नहीं देख सकते हैं. पिछले साल कम से कम 21 गैंडे मारे गए थे.”

दुनिया भर के एक सींग वाले 3,300 गैंडे की आबादी की तुलना में इस उद्यान के 2012 की जनगणना के मुताबिक यहां 2,290 गैंडे हैं.

असुरक्षित प्रजाति

1990 के दशक की शुरुआत में ही ये प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर थी और फिलहाल इंटरनैशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के द्वारा इसे 'असुरक्षित प्रजाति' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा गश्त तेज कर दी है और निगरानी में सुधार के लिए वे राष्ट्रीय उद्यान के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों से भी मदद लेने की योजना बना रहे हैं.