भारत में कम करोड़पति होने के चार कारण

  • 1 मार्च 2013
चिदंबरम
खुद चिदंबरम ने भी कहा कि इस श्रेणी में केवल 42,800 लोग ही आते हैं.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने बजट में उन लोगों के लिए 10 प्रतिशत सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव दिया है जिनकी वार्षिक आय एक करोड़ से अधिक है.

उन्होंने कहा, ''बात जब संसाधन जुटाने की है तो मैं उन लोगों के सिवा कहां जा सकता हूँ जो धनी हैं.''

लेकिन खुद चिदंबरम ने ही कहा कि इस श्रेणी में केवल 42,800 लोग ही आते हैं. इतनी बड़ी आबादी के देश में क्या केवल इतने ही लोग हैं जो एक करोड़ से अधिक कमाते हैं.

या फिर बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो टैक्स नहीं देते या कम टैक्स देते हैं?

मनी लाइफ मैगज़ीन की प्रबंध संपादक सुचेता दलाल का मानना है कि हमारे देश में इतने कम लोगों का इस सूची में होना एक 'स्कैंडल' है.

विदेशी दौरे महंगी गाड़ियां और आलीशान घर और महंगी ज़मीनों के मालिकों को देखेंगे तो कहना पड़ेगा कि यह नामुमकिन है कि साल में एक करोड़ से अधिक कमाने वाले केवल इतने ही लोग हैं.

उनकी राय में इस सूची में इतने कम लोगों के होने के यह हैं कारण

सो रहा है आयकर विभाग

ऐसा लगता है हमारा आयकर विभाग आंख बंद करके बैठा है. क्योंकि एक करोड़ से अधिक कमाने वाले तो सिर्फ मुंबई में ही इससे अधिक होने चाहिए.

रास्ते में खड़े हो जाएं तो आप देखेंगे कि एक करोड़ रुपए से अधिक की कारें 50,000 से ज्यादा होंगी.

इसी तरह दक्षिण मुंबई में फ्लैट की कीमत 35 करोड़ से कम के नहीं है. जो लोग आजकल यह सब खरीद रहे हैं इन लोगों की आय मुझे नहीं लगता एक करोड़ सालाना से कम हो सकती है.

टैक्स की चोरी

इस सूची में लगभग सब वेतनभोगी लोग होंगें शायद कुछ फिल्मस्टारों को छोड़कर.

वेतन पाने वाले लोग अपनी आय छिपा नहीं सकते. उन्हें मिलने वाला बोनस वगैरह सब कागज़ों में होता है.

इनमें कंपनियों के कुछ मैनेजिंग डायरेक्टर शामिल हैं जिनको दिए जाने वाले वेतन आदि जो शेयर के मालिकों को बताया जाता है.

इसमें कुछ फिल्म स्टार भी शामिल हो सकते हैं. बाकी सब टैक्स देने से बचते हैं. यह आयकर विभाग को भी मालूम है लेकिन वो इसके बारे में कुछ करते नहीं हैं. मुझे यकीन है कि इस फेहरिस्त में कोई राजनीतिक नेता नहीं है.

ई-फाइलिंग

सरकार ने पिछले पांच सालों में ई-फाइलिंग शुरु की है जिससे साधारन व्यक्ति तो ईमानदारी से अपना आयकर देता है.

इन आंकड़ो का कोई विश्लेषण नहीं करता. इस सारी इकट्ठा करना आसान है.

लेकिन आकलन बहुत तकनीकी काम है जो नहीं किया जा रहा.

खेती से आय टैक्स रहित

खेती से आने वाली आय पर कोई टैक्स नहीं है. हमारे देश में खेती से बहुत अधिक मुनाफा नहीं होता. यह कोई बड़ा लाभदायक व्यवसाय नहीं है

इसलिए इतने सारे किसान आत्महत्या करते हैं. लेकिन जो लोग खेती बाड़ी से बहुत अच्छी जीवनशैली रख सकते हैं तो उन पर भी टैक्स होना चाहिए.

आरटीआई कार्यकर्ता भी मांग कर रहे हैं कि नेताओं और कुछ अन्य लोगों की आय सार्वजनिक होनी चाहिए.

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