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कई दिनों बाद खोला अफ़ज़ल का आख़िरी ख़त

 सोमवार, 18 फ़रवरी, 2013 को 20:36 IST तक के समाचार
Afzal guru letter

अफ़ज़ल गुरू ने अपनी आख़िरी चिट्ठी में दस्तख़त नहीं किए हैं.

फाँसी के फंदे की ओर ले जाए जाने के एक घंटा पहले लिखी गई अफ़ज़ल गुरू की चिट्ठी को उसके घर वालों ने कई दिन तक नहीं खोला.

अफज़ल के भाई यासीन गुरू ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि क्लिक करें 9 फ़रवरी को उन्हें फाँसी दिए जाने के दो दिन बाद ये चिट्ठी परिवार को मिली.

यासीन ने कहा, “जब चिट्ठी मिली तो मेरी भाभी (अफ़ज़ल गुरू की पत्नी) बहुत सदमे में थी. इसलिए हमने चिट्ठी को कुछ दिनों तक खोला ही नहीं. जब दो चार दिन बाद वो थोड़ा सामान्य हुईं तो उन्होंने ही ये चिट्ठी खोली.”

चिट्ठी में न ही उन्होंने अपनी पत्नी का नाम लिखा है और न बच्चे का. उन्होंने माता-पिता का भी अलग से ज़िक्र नहीं किया है.

उनके भाई यासीन ने कहा, “उस समय जब उनको पता था कि एक घंटे बाद शहादत मिलने वाली है, क्लिक करें उन्हें कोई याद नहीं रहा. सिर्फ़ परिवार के साथ मुस्लिम उम्मा याद रही. उस वक़्त आँसुओं के अलावा हमारे पास कहने को कुछ नहीं था.... ज्यों ही हमने ख़त खोला, आपको यक़ीन नहीं होगा कि हम सब रो पड़े.”

इस चिट्ठी में सबसे ऊपर बाईं ओर अफ़ज़ल ने सबसे पहले समय लिखा – सुबह के 6:25. लेकिन चिट्ठी के अंत में न तो अफ़ज़ल का नाम हैं और न ही उनके दस्तख़त.

शोकाकुल परिवार

अफ़ज़ल का आख़िरी ख़त

सुबह के
6:25
बिस्मिल्लाहिर्रहमानअर्रहीम
9:2:2013

मोहतरम अहले ख़ाना (परिवार) और अहले ईमान (ईमान वालों) अस्सलाम अलैकुम.

अल्लाह पाक का लाख शुक्रिया कि उसने मुझे इस मुक़ाम के लिए चुना. बाक़ी मेरी तरफ़ से आप तमाम अहले ईमान (ईमान वालों) को भी मुबारक हो कि हम सब सच्चाई और हक़ के साथ रहे और हक़ो सच्चाई की ख़ातिर आख़िरत हमारा इख़्तिताम (अंत) हो - अहले ख़ाना को मेरी तरफ़ से गुज़ारिश है कि मेरे से इख़्तेताम (अंत)पर अफ़सोस की बजाए वो इस मक़ाम का एहतराम (सम्मान) करें. अल्लाह पाक आप सबका हाफ़िज़ ओ नासिर (सुरक्षा करने वाला और मददगार) है.

अल्लाह हाफ़िज़.

लेकिन उनके परिवार वालों का कहना है कि चिट्ठी का हस्तलेख अफ़ज़ल गुरू से बिलकुल मिलता है.

यासीन गुरू ने ये भी कहा है कि अफ़ज़ल गुरू की ओर से उन्हें सिर्फ़ एक ही चिट्ठी मिली है.

यासीन ने कहा, “घर के लोगों ने तय किया कि ये चिट्ठी सिर्फ़ हमारी नहीं है बल्कि ये मुस्लिम उम्मा के नाम है इसलिए इसे मीडिया को भेज दिया जाए और अफ़ज़ल साहब का आख़िरी संदेश लोगों तक पहुँचाएँ.”

जब से परिवार को अफ़ज़ल की फाँसी की जानकारी मिली, उनकी पत्नी से मिलने वालों का सिलसिला जारी है.

यासीन गुरू ने कहा,“हमारी भाभी सिर्फ़ कमरे में ही रहती है. लोग मिलने के लिए आते हैं. वो बहुत कम बात करती है. अफ़ज़ल के बच्चे के साथ भी हम इस मामले में कोई बात नहीं करते. वो सिर्फ़ 12-13 साल का है. हमारी कैफ़ियत तो ऐसी है कि हम उससे बात भी नहीं करना चाहते कि कुछ ऐसी चीज़ हुई है. वो हमारी तरफ़ देखता है और कुछ नहीं कहता है.”

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