क्या इन 15 लोगों को भी मिलेगी फाँसी?

  • 9 फरवरी 2013
अफज़ल गुरु
अफज़ल गुरु से पहले कसाब को फाँसी दी गई थी.

संसद पर हमले के अभियुक्त अफज़ल गुरु को भी फांसी दे दी गई है.

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बताया, "तीन फरवरी को राष्ट्रपति महोदय की दया याचिका खारिज करने की फ़ाइल मिली. चार फरवरी को मैंने इस फ़ाइल पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद की कार्रवाई के तहत नौ फरवरी को सुबह आठ बजे अफ़ज़ल गुरु को फॉंसी दिया जाना तय किया गया."

इससे पहले, नवंबर 2012 में मुंबई हमले के अभियुक्त अजमल कसाब को फाँसी दी गई थी.

पर भारत में अब भी 15 ऐसे अपराधी हैं जिन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

पर उन्हें अब भी दया की उम्मीद है. कौन हैं ये लोग?

सोनिया और संजीव

संपत्ति के लिए अपने ही परिवार के आठ लोगों को मौत के घाट उतारने के दोषी इन दोनों की फांसी पर साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने मोहर लगाई थी. इसी साल उनकी दया याचिका को गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया था.

गुरमीत सिंह

अपने परिवार के 13 लोगों के कत्ल के दोषी गुरमीत सिंह को साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फासी की सज़ा दी थी. साल 2009 में गृह मंत्रालय ने उनकी दया याचिका को खारिज किया था. अब उन्होंने राष्ट्रपति से दया की अपील की है.

धर्मपाल

राष्ट्रपति के पास इस समय जो दया याचिका के मामले हैं उनमें धर्मपाल का मामला सबसे पुराना है.

इन्होंने एक ही परिवार के पांच लोगों का उस समय कत्ल किया था जब वे बलात्कार के एक अन्य मामले में जमानत पर जेल से बाहर थे.

साइमन, गणप्रकाश, मदैया और बिलावांद्रा

इन चार लोगों को बारूदी सुरंग का विस्फोट करके कर्नाटक के 22 पुलिस कर्मियों को मारने का दोषी पाया गया था.

साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें फांसी की सज़ा सुनाई थी. लेकिन केद्रीय गृह मंत्रालय ने इनकी दया याचिका को पिछले ही साल मई के महीने में खारिज करने की सिफारिश के साथ राष्ट्रपति को भेजा था.

सुरेश और रामजी

संपत्ति के मामले में अपने पांच रिश्तेदारों को कत्ल करने के लिए यह दोनों साल 2001 में दोषी पाए गए थे. पिछले साल फरवरी में गृह मंत्रालय ने इनकी दया याचिका राष्ट्रपति को भेजी थी.

प्रवीण कुमार

एक परिवार के चार लोगों के कत्ल के दोषी प्रवीण को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2003 में दोषी पाया था. पिछले साल गृह मंत्रालय ने इनकी दया याचिका खारिज कर राष्ट्रपति को भेजी थी.

सईबन्ना निंगप्पा नाटिकर

इन्होंने अपनी पत्नी और बेटी का कत्ल किया था और साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दोषी पाया था. पिछले साल सितंबर से इनकी अर्ज़ी राष्टपति के पास है.

जफर अली

इन्होंने अपनी पत्नी के अलावा पांच बेटियों की हत्या की थी. साल 2004 में दोषी पाए गए अली की दया याचिका की फाइल राष्ट्रपति के पास नवंबर 2011 में पहुंची.

सुंदर सिंह

साल 2010 में अपने भाई के परिवार के पांच सदस्यों की हत्या के दोषी पाए जाने वाले सुंदर की दया याचिका इस साल फरवरी में गृह मंत्रालय ने खारिज कर के राष्ट्रपति के पास भेजी.

अतबीर

इन्होंने अपने सौतेले भाई, मां और बहन का कत्ल किया था और पिछले लगभग पांच महीने से ही इनकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंची है.

ठुकराई गई याचिकाएँ

इसके अलावा पाँच लोगों की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है.

इनमें दविंदर पाल सिंह भुल्लर सबसे प्रमुख हैं, जिन्हें 1993 में एक कार बम विस्फोट में नौ लोगों को मारने और कई लोगों को घायल करने का दोषी पाया गया था. भुल्लर खालिस्तानी चरमपंथी संगठन से जुड़े थे.

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में भुल्लर को फाँसी की सजा पर मुहर लगाई थी और पिछले साल राष्ट्रपति ने इनकी क्षमा याचिका को ठुकरा दिया था.

टी. सुथेतिराजा उर्फ़ सांतन, श्रीहरण उर्फ़ मुरुगन और जी पेरारिवलन उर्फ अरिवू की क्षमा याचना भी राष्ट्रपति ने ठुकरा दी है. उन्हें राजीव गाँधी की हत्या के लिए दोषी पाया गया था.

महेंद्र नाथ दास उर्फ गोविंद दास की क्षमा याचना 2011 में खारिज कर दी गई थी. उन्होंने असम में गुहाटी के फैंसी बाज़ार में हरकांत दास का सिर काट डाला था और कटे सिर को लेकर ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था.