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अफ़ज़ल गुरु के चेहरे पर ना अफसोस था ना…

 सोमवार, 11 फ़रवरी, 2013 को 11:19 IST तक के समाचार

अफज़ल की फाइल फोटो

भारतीय संसद पर हमले के आरोप में शुक्रवार सुबह जब जैश–ए-महोम्मद के चरमपंथी अफ़ज़ल गुरु को फांसी के लिए ले जाया गया तो उन्हें कोई अफसोस नहीं था.

इस पूरी कार्रवाई पर नज़र रखने वाले तिहाड़ जेल के वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अपने अंतिम समय में अफज़ल गुरु के ‘बेहद शांत’ थे और व्यहवार में संयमित नज़र आ रहे थे. अधिकारी के मुताबिक उनके चेहरे पर कोई अफसोस के भाव नहीं थे.

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “वो बहुत शांत थे और उनका व्यवहार बहुत संयमित था.”

अफ़ज़ल गुरु को तिहाड़ जेल नम्बर तीन में रखा गया था और उन्हें फांसी के बारे में शुक्रवार शाम को ही जानकारी दे दी गई थी. जब उन्हें फांसी की जानकारी दी गई तब वो थोड़े घबराए हुए नज़र आए.

कश्मीर के सोपोर के निवासी अफ़ज़ल गुरु को बेहद गुप्त तरीके से शनिवार सुबह 8 बजे फांसी दी गई.

"आपके सवाल के जवाब में मैं सिर्फ यही कह सकती हूं कि वो स्वस्थ थे."

विमला मेहरा, जेल महानिदेशक

फांसी दिए जाने के दौरान एक मजिस्ट्रेट, एक डॉक्टर और वरिष्ठ जेल अधिकारी मौजूद थे.

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अफ़ज़ल गुरु को सुबह पांच बजे उठाया गया और चाय दी गई.

शांत और संयमित

सुबह उठने के बाद उन्होंने नमाज़ अदा की जिसके बाद उन्हें 7.30 बजे फांसी के लिए ले जाया गया.

तिहाड़ जेल की महानिदेशक विमला मेहरा से जब पूछा गया कि अपने अंतिम क्षणों में अफ़ज़ल अफसोस रहित थे या नहीं तो विमला मेहरा ने कहा, “आपके सवाल के जवाब में मैं सिर्फ यही कह सकती हूं कि वो स्वस्थ थे.”

तिहाड़ जेल परिसर के आसपास सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.

अफ़ज़ल को फांसी के लिए ले जाए जाने से पहले एक डॉक्टर ने उनका मेडिकल परीक्षण किया.

विमला मेहरा के अनुसार फांसी देने की प्रक्रिया को सामान्य रूप से पूरा किया गया.

फांसी दिए जाने के बाद अफ़ज़ल गुरु के शव को पूरी धार्मिक प्रक्रिया के साथ तिहाड़ जेल में ही दफ़ना दिया गया.

एक मौलवी ने अफ़ज़ल की जनाज़े की नमाज़ पढ़ी.

2001 में संसद हमले में सज़ा दिए जाने के बाद अफ़ज़ल गुरु ने 10 साल जेल में बिताए.

जेल अधिकारियों ने ये नहीं बताया कि फांसी से पहले उन्होंने अपनी कोई अंतिम इच्छा ज़ाहिर की या नहीं और उनके अंतिम शब्द क्या थे.

अफ़ज़ल गुरु की वकील रही नंदिता हक्सर ने कहा है कि सरकार ने फांसी दिए जाने के फैसले की जानकारी अफ़ज़ल गुरु के परिवार को नहीं दी थी जबकि गृह मंत्रालय का कहना है कि फांसी से पहले स्पीड पोस्ट के ज़रिए ये जानकारी अफ़ज़ल गुरु के परिवार वालों को दे दी गई थी.

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