ये आपको ख़ूबसूरत बना सकते हैं!

  • 24 फरवरी 2013
डॉक्टर अमन शर्मा कहते हैं कि त्वचा विशेषज्ञता में पर्याप्त संभावनाएं हैं लेकिन जागरूकता की कमी एक रूकावट है.

इस दावे में कोई अतिरेक नहीं जब बात त्वचा विशेषज्ञ की हो क्योंकि यही हैं ख़ूबसूरती के चितेरे जो इंसानों को मनचाही शक्ल-सूरत देने की क़ाबिलियत रखते हैं.

हालांकि सच ये है कि अंग्रेज़ी में डर्मेटॉलजी कही जाने वाली डॉक्टरी की इस विशेष शाखा में सिर्फ़ ख़ूबसूरती से जुड़ी कारीगरी ही नहीं, त्वचा संबंधी तमाम बीमारियों का इलाज भी शामिल है.

तकनीकी तौर पर ऐस्थेटिक फ़िज़िशियन कहलाने वाले दिल्ली के डॉक्टर अमन शर्मा इस विशेषज्ञता को समझाते हुए कहते हैं, “ये ज़रूर है कि हाल के वर्षों में त्वचा विशेषज्ञता का मतलब सिर्फ़ कॉस्मेटिक सर्जरी से निकाला जाता रहा है."

लेकिन उनके मुताबिक़ ये धारणा सही नहीं है क्योंकि इसमें "मुख्य रूप से त्वचा, नाख़ून और बालों से जु़ड़ी तमाम बीमारियों का इलाज शामिल है और आम धारणा के उलट कई इलाज बिना सर्जरी के भी होते हैं. ये वास्तव में कला और विज्ञान का संगम है.”

चुनौतियां

फ़िलहाल दिल्ली के पॉश ख़ान मार्केट में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर अमन ने एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली के एक संस्थान से डर्मेटॉलजी में विशेषज्ञता हासिल की और सिंगापुर से सर्जरी और लेज़र में विशेष प्रशिक्षण भी लिया.

हालांकि डॉक्टरी की इस शाखा को लेकर भारत में जागरूकता अब भी कम है.

आमतौर पर त्वचा से जुड़ी परेशानियों को लेकर लोग घरेलू उपचार पर ही ज़्यादा भरोसा करते हैं तो करियर के तौर पर क्या एक त्वचा विशेषज्ञ के लिए भरोसा जीतना बहुत बड़ी चुनौती है.

अमन कहते हैं कि "निश्चित तौर पर इस बाधा को पार करना होता है. शुरूआत में जिस तरह से अप्रशिक्षित लोगों ने इलाज करना शुरू किया और उसके अच्छे परिणाम नहीं निकले तो भरोसे में कमी आई लेकिन सिर्फ़ यही एक चुनौती नहीं है."

त्वचा से जुड़े इलाज औऱ शल्य चिकित्सा को लेकर भ्रम की स्थिति है.

वो कहते हैं, "बड़ी समस्या है कि अगर आपको बेहतर मशीनों का इस्तेमाल करना है तो लागत ज़्यादा होती है और लोगों को ये समझा पाना मुश्किल है. जिसकी वजह से अक्सर डॉक्टर इलाज की गुणवत्ता और उसके प्रभावों को लेकर सही जानकारी नहीं देते.

"मसलन आप बोटॉक्स को लीजिए जिसके बारे में ना जाने कितनी ग़लत धारणाएं बनी हुई हैं.”

भविष्

ये बात साफ़ है कि भारत में डर्मेटॉलजी को लेकर बहुत ज़्यादा जागरूकता दिखाई नहीं देती तो क्या इसके मायने हैं कि इस विशेषज्ञता को हासिल करने के बाद कार्यक्षेत्र केवल बड़े शहर ही हो सकते हैं.

इस सवाल के जवाब में अमन कहते हैं कि "ऐसा सोचना ग़लत होगा क्योंकि अब तमाम डॉक्टर और मशीनें दूरदराज़ के इलाक़ों तक पहुंच चुके हैं."

"ये ज़रूर है कि लोगों तक इस बात की जानकारी पहुंचाना कि ऐसी कोई डॉक्टरी है जिसके ज़रिए ना सिर्फ़ इलाज संभव है बल्कि बहुत सुरक्षित तरीक़े से चेहरे आकार-प्रकार बदला जा सकता है में अभी थोड़ा वक्त़ लगेगा संभावनाएं अनंत हैं.”

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