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'हर हाथ में फ़ोन' स्कीम को कैसे लगा पलीता?

 शुक्रवार, 8 फ़रवरी, 2013 को 14:42 IST तक के समाचार
मुफ्त फोन

इस स्कीम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर उस व्यक्ति को मुफ्त फोन और कनेक्शन दिया जाना था जिसके पास फोन नहीं है.

पिछले साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक भव्य योजना का एलान करने वाले थे. स्कीम थी- हर हाथ में फोऩ लेकिन 11,500 करोड़ रुपए की इस स्कीम को दूरसंचार मंत्रालय ने नामंज़ूर कर दिया है.

दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि यूएसओ फ़ंड का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए. नवंबर के महीने में उन्होंने योजना आयोग को लिखा, ''किसी भी सीधी सब्सिडी या फ़ायदे की योजना से कई मुश्किलें पेश आ सकती है.''

इस स्कीम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर उस व्यक्ति को फ़ोन दिया जाना था जिसके पास फ़ोन नहीं है. इसी यूएसओ फ़ंड से इस योजना का ख़र्च उठाया जाना था.

बीबीसी के पास मौजूद दस्तावेज़ों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री कार्यालय ने योजना आयोग को आदेश दिया था कि इस स्कीम को 10 अगस्त तक तैयार किया जाए.

अगर सब कुछ सही तरीक़े से चलता तो पिछले साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यह एलान करते कि देश में हर उस व्यक्ति को मोबाइल फ़ोन दिया जाएगा जिसके पास यह नहीं है.

प्रयास जारी

हालांकि सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने अभी भी इस स्कीम को पूरी तरह से ख़ारिज नहीं किया है. अब उपाए तलाशे जा रहे हैं कि किसी तरीक़े से इसमें बदलाव किए जाएं ताकि यह मंज़ूर किया जा सके.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने बीबीसी को बताया, ''मेरे ख्याल से इसे अभी गिराया नहीं गया है. अभी भी इस पर वो लोग ग़ौर कर रहे हैं जिनका काम यह देखना है कि क्या यह परियोजना आर्थिक रूप से तार्किक है.''

यह भी तह किया गया था कि यह फ़ायदा जिन लोगों को मिलेगा उनमें से 50 प्रतिशत लोग अनुसूचित जातियों, जनजातियों, पिछड़ी जातियों, बीपीएल और विकलांग लोगों की श्रेणी से होंगे.

स्कीम के तहत हर घर से दो वयस्क लोग इस स्कीम के लिए योग्य होंगे. केवल वही लोग इसके लिए योग्य होंगे जो आधार कार्ड या मतदाता सूची में हैं.

बीबीसी के पास मौजूद दस्तावेज़ों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री कार्यालय ने योजना आयोग को आदेश दिया था कि इस स्कीम को 10 अगस्त तक तैयार किया जाए.

अगर सब कुछ सही तरीक़े से चलता तो पिछले साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यह एलान करते कि देश में हर उस व्यक्ति को मोबाइल फ़ोन दिया जाएगा जिसके पास यह नहीं है.

रोज़ का एक रुपया

"मेरे ख्याल से इसे अभी गिराया नहीं गया है. अभी भी इस पर वो लोग गौर कर रहे हैं जिनका काम यह देखना है कि क्या यह परियोजना आर्थिक रुप से फीज़िबल है. "

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोनटेक सिंह अहलूवालिया

योजना के तहत हर उपभोक्ता को दो साल के लिए 30 रुपए हर महीने के हिसाब से 720 रुपए देना होगा. उसे हर महीने 150 मिनट का फ्रीटाइम मिलेगा. उसे ज़िंदगी भर के लिए मुफ्त हैंडसेट और मुफ्त कनेक्शन मिलेगा.

एससी ओबीसी बीपीएल जैसे विशेष उपभोक्ता को टेल्को की ओर से मुफ्त हैंडसेट मिलेगा जबकि उन्हें 360 रुपए देने होंगे और दूसरे साल 30 रुपए महीना देना होगा.

प्लान के मुताबिक़ भारत में कुल 80 करोड़ लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं यानी अनुमानत: 16 करोड़ परिवार. इनमें से 10 करोड़ परिवारों के पास फ़ोन हैं लेकिन छह करोड़ लोगों के पास नहीं.

योजना के मुताबिक़ इन छह करोड़ परिवारों में से अगर पांच करोड़ को दो फ़ोन प्रति परिवार दिया जाए यानी कुल 10 करोड़ फ़ोन तो इस पर कुल ख़र्च 11,520 करोड़ आना था.

क्या था अड़ंगा?

लेकिन दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि कोई गारंटी नहीं है कि हर उपभोक्ता दूसरे साल में भुगतान करेगा. उसका कहना है, ''कई उपभोक्ता रिचार्ज नहीं कराएंगे. 30 रुपए महीने में 150 नहीं केवल 55 मिनट की कॉल मुफ्त दी जा सकती है.''

बीएसएनएल का कहना है कि सारे करों सहित 800 रुपए में हैंडसेट मिलना कठिन है. इसलिए उसका कहना था कि सरकार इसे लिए पहले से भुगतान करे.

स्कीम के हिसाब से सभी गांव जिनकी आबादी 500 से कम है उन्हें तीन सालों में फ़ोन दिए जाने थे. लेकिन बीएसएनएल ने कहा कि इस परियोजना में किसी ऑपरेटर के लिए नेटवर्क लगाने के लिए कोई प्रेरणा नहीं है.

विभाग का कहना था कि बिना हैंडसेट के कनेक्शन देना बेहतर होगा.

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