रॉक बैंड: मुफ्ती के खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की तैयारी

  • 7 फरवरी 2013
इमरोज़
परवेज़ इमरोज़ लड़कियों के रॉकबैंड प्रगाश के समर्थन में सामने आए हैं

भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय एक प्रमुख मानवाधिकार समूह ने लड़कियों के रॉक बैंड 'प्रगाश' के खिलाफ़ फतवा जारी करने वाले धर्मगुरु मुफ्ती बशीर को अदालत में चुनौती दी है.

भारत प्रशासित कश्मीर में नागरिक समाज और समाज में प्रभावी माने जानेवाले मौलवी वर्ग के बीच ये अब तक की पहली कानूनी लड़ाई होगी.

प्रगाश नाम के लड़कियों के रॉक-बैंड ने पहले ही अपना बैंड बंद करने की घोषणा कर दी है. उन्होंने ये घोषणा फेसबुक पर उनके खिलाफ़ दी गई टिप्पणियों और सरकार समर्थित माने जानेवाले मुफ्ती बशीर के फतवे के बाद की है.

इसके कुछ ही दिन बाद मु्फ्ती बशीर ने मुसलमान लड़कियों के गाना गाने को इस्लाम विरूद्ध करार देते हुए उनके खिलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया था.

बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में कोएलिशन ऑफ सिविल सोसायटी के प्रमुख परवेज़ इमरोज़ ने कहा, ''हम मुफ्ती बशीर के खिलाफ़ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर रहे हैं. सिविल सोसायटी ना सिर्फ उनकी कानूनी हैसियत पर सवाल करेगी, बल्कि उनसे ये भी पूछेगी आख़िर वे किस हक़ से लोगों से उनके पसंद-नापसंद पर सवाल करते हैं.''

साँठगाँठ

परवेज़ इमरोज़ ने मुफ्ती बशीर को 'सरकारी एजेंसी' का हिस्सा बताया है, जो ज़्यादातर गैरज़रूरी मुद्दों को हवा देते हैं. उनके मुताबिक ये एजंसियाँ इन मुद्दों को हवा देकर, सरकार असल मुद्दों से सरकार का ध्यान हटाने में मदद करती हैं.

इन असल मुद्दों में कश्मीर में मानवाधिकार हनन का मुद्दा मुख्य है.

इमरोज़ के अनुसार ये धर्मुगुरु उस वक्त चुप रहते हैं, जब कश्मीर में कब्र खोद दिए जाते हैं और युद्ध से संबंधित अपराध किए जाते हैं.

इमरोज़ आगे कहते हैं, ''बदकिस्मती से भारतीय मीडिया ऐसे मुद्दों को ज़ोर-शोर से हवा देती है. जिससे पूरे भारत और पश्चिम में कश्मीर को ग़लत तरह से पेश किया जा सके.''

इमरोज़ के अनुसार उन्हें फेसबुक पर रॉकबैंड की इन लड़कियों के खिलाफ़ टिप्पणी करने पर गिरफ्तार किए गए तीन लड़कों को कानूनी मदद दिए जाने पर भी कोई आपत्ति नहीं है.

परस्पर विरोधी रवैया

परवेज़ के मुताबिक, ''सरकार का रवैया यहां पूरी तरह से विरोधाभासी है. एक तरफ वो कहती है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की समर्थक है और दूसरी तरफ जो लोग खुलकर अपनी भावनाँए प्रदर्शित करते हैं वो उनके खिलाफ़ हो जाती है.''

लड़कियों के रॉक बैंड प्रगाश को धमकी दी गई थी.

परवेज़ इमरोज़ का दावा है कि स्थानीय प्रशासन, भारतीय मीडिया और कुछ कश्मीरी धर्मगुरुओं ने आपस में गठजोड़ कर इस पूरे मुद्दे को हवा दी है ताकि पूरे कश्मीर समाज को एक कट्टर और दकियानूसी समाज के रुप में प्रदर्शित किया जा सके.

इससे पहले कश्मीर घाटी के प्रमुख अलगाववादी गुट हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने भारतीय मीडिया पर आरोप लगाया था कि वो इस मुद्दे को ज़बरदस्ती बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है.

लेकिन मुफ्ती बशीर के विरोध का मतलब लड़कियों का समर्थन हो सकता है? इस सवाल के जवाब में परवेज़ इमरोज़ का कहना है, हमारा इरादा हमारे लोगों को काफी अच्छी तरह से समझ आ जाएगा.

ये पूछने पर कि क्या कश्मीरी समाज पिछले कुछ समय से ज्य़ादा असहिष्णु हो गया है, इमरोज़ कहते हैं, ''लोग यहां संगीतमय शामों का आयोजन अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुसार करते आए हैं. वे सरकार द्वारा घाटी में फिल्मकारों के फिल्म की शूटिंग करने के फैसले से खुश नहीं थे. अगर हिंसा पसंद लोग यहां संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं तो लोग अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर देते हैं.''

इस बीच पुलिस ने कश्मीर घाटी में कई जगहों पर दबिश दी है और उन तीन युवकों को गिरफ्तार भी किया गया है जिनपर कथित तौर पर रॉकबैंड की तीनों लड़कियों को धमकी देने के आरोप हैं.

गिरफ्तार किए गए तीन युवकों में से एक की मां ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि, ''अगर उन लड़कियों की निंदा करके मेरा बेटा अपराध करता है तो उन धर्मगुरुओं के खिलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती. आखिर मुफ्ती बशीर जैसे धर्मगुरु मशहूर क्यों हो रहे हैं?''

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