BBC navigation

जब जेठ ने किया मेरी बच्ची के साथ दुष्कर्म...

 गुरुवार, 7 फ़रवरी, 2013 को 12:15 IST तक के समाचार
बाल यौन शोषण

बहुत से मामलों में यौन शोषण करने वाले जान पहचान के होते हैं

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि भारत में घरों, स्कूलों और रिहायशी केंद्रों में बाल यौन शोषण सामान्य बात है.

संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए बेहतर उपाय करने होंगे.

दिल्ली में पिछले साल एक चलती बस में 23 वर्षीय युवती के सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले के बाद सरकार पर यौन अपराधों पर नियंत्रण करने का खासा दबाव है.

ह्यूमन राइट्स वॉच की ‘ब्रेकिंग द साइलेंस: चाइल्ड सेक्स अब्यूज़ इन इंडिया’ नाम की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दिशा में सरकारी उपाय क्यों नाकाम हो रहे हैं.

सुनिए कुछ ऐसे ही बच्चों की दांस्ता, जो कच्ची उम्र में बलात्कार और यौन उत्पीड़न का शिकार हुए. सभी पीड़ितों के नाम बदले हुए हैं.

ज्योति, 6 वर्ष की उम्र में हुआ यौन शोषण

मैं छह साल की थी. मुझे पढाई में मदद के लिए ट्यूटर की जरूरत थी. एक व्यक्ति मुझे ट्यूशन पढ़ाने आने लगा.

उस व्यक्ति का व्यवहार बहुत दोस्ताना था और घर में सभी महिलाएं उसे पसंद करती थीं. लेकिन वो व्यक्ति मेरा यौन शोषण कर रहा था.

मुझे नहीं पता था कि जो मेरे साथ हो रहा है, उसे किस तरह अपने माता पिता को बताऊं. मैं समझ पाई कि जो मेरे साथ हो रहा है, क्या दूसरों के साथ भी ऐसा होता है. क्या ये सामान्य बात है.

मुझे याद है कि मैं रात में उठ जाया करती थी और रोती थी क्योंकि मैं अपने आपको बहुत अकेला महसूस करती थी. ये भावना मुझे लंबे समय तक घेरे रही, तब भी जब यौन शोषण रुक गया.

नेहा, 16 वर्ष की थी जब गांव के दो लोगों ने बलात्कार किया

दो लोग थे. उन्होंने मुझे पकड़ लिया था. उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ दिए थे. उन्होंने मुझे मारा भी. उनके चेहरे ढके हुए थे. एक का नकाब तो मैंने उतार दिया था.

बाल यौन शोषण

बच्चे समझ ही नहीं पाते हैं कि जो उनके साथ हो रहा है, उसे कैसे बताएं

मेरी बात का किसी ने विश्वास नहीं किया. पुलिस मेरे परिवार पूछती है कि जब वो घर पर आई तो आपने चेक किया था कि उसका बलात्कार हुआ है या नहीं.

पुलिस ने मेरा मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था. जिस तरह का बर्ताव उन्होंने किया, वो मुझे अच्छा नहीं लगा. कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि मैं ही उन लड़कों के साथ ये करना चाहती होऊंगी.

वो मुझसे कह रहे थे कि मैं ये मान लूं कि मैं उनकी गर्लफ्रेंड हूं. जब मैं चेक-अप के लिए गई तो डॉक्टर ने बताया कि मेरी पिटाई की गई है, लेकिन उसने कहा कि किसी तरह की अंदरूनी चोट नहीं है. मैं बेबस थी. किसी ने मेरा विश्वास नहीं किया और अब भी कोई मेरा विश्वास नहीं करता है.

गांव वाले मेरे बारे में बुरी बुरी बातें करते हैं.

अदिति, यौन उत्पीड़न की शिकार बच्ची की मां

मेरे जेठ हैं, जिन्होंने मेरी बेटी का यौन उत्पीड़न किया. जब मैं घर से चली जाती हूं तो वो तब वो ऐसा करते थे.

जब मुझे पता चला तो मैंने अपने पति को इस बारे में बताया तो उनका जवाब था, “हमें तो कोई भरोसा नहीं है कि तेरी बेटी के साथ ऐसा हुआ है."

लेकिन मैं अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांगती हूं. मैं चाहती हूं कि जो मेरी बेटी के साथ जो हुआ, औरों के साथ ऐसा न हो.”

कृष्णा, 12 साल की उम्र में जून 2012 में बलात्कार का शिकार हुई

बाल यौन शोषण

बाल यौन शोषण एक गंभीर समस्या है

जब मैं पुलिस थाने गई तो थानेदार ने मुझसे पूछताछ की. मुझे हवालात में रखा गया.

वो बार बार मुझसे अपना बयान बदलने को कह रहे थे. उन्होंने कहा कि अगर मैं बयान नहीं बदलूंगी तो मुझे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.

उन्होंने 12 दिन तक मुझे जेल में रखा. उन्होंने मुझे अपने माता पिता से भी नहीं मिलने दिया. जब भी मैं उस समय के बारे में सोचती हूं तो सहम जाती हूं.”

सारा, अपनी तीन साल की बेटी के बलात्कार पर

डॉक्टर बहुत ही कम उम्र की थी. मुझे नहीं लगता कि उसे बलात्कार के बारे में ज्यादा पता था.

वो बार बार पूछ रही थी क्या खून निकल रहा है, क्या उसे चलने में समस्या हो रही है.

लेकिन परीक्षण के छह से आठ घंटों बाद मेरी बेटी पेशाब नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसे बहुत दर्द होता था.

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.