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पटना में नहीं चला अन्ना हजारे का जादू

 बुधवार, 30 जनवरी, 2013 को 16:49 IST तक के समाचार

पटना में अन्ना हजारे की रैली को बहुत ज़्यादा समर्थन नहीं मिला.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित जनतांत्रिक रैली में अन्ना हजारे ने जनतांत्रिक मोर्चा नाम से एक संगठन बनाने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि उनका संगठन भ्रष्टाचार के अलावा तमाम तरह की जन समस्याओं को लेकर देशव्यापी संघर्ष शुरू करेगा.

अन्ना ने यह भी ऐलान किया कि उनके जनतांत्रिक मोर्चे में शामिल होने वाले लोग चुनावी राजनीति से दूर रहेंगे.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना हजारे की जनतंत्र रैली को लेकर पटना की जनता पर कोई ख़ास उत्साह नहीं दिखा. स्थानीय गांधी मैदान में दोपहर बाद आयोजित इस रैली में बहुत ज़्यादा भीड़ नहीं दिखी.

गांधी मैदान में रैली की बजाय एक सामान्य जनसभा का माहौल दिख रहा था.

उम्मीद थी कि इस रैली में बहुत ज़्यादा भीड़ जुटेगी लेकिन यहां बहुत कम लोग आए हैं. गांधी मैदान का बडा़ हिस्सा खाली दिखा.

लेकिन बुजुर्गों और स्थानीय छात्रों का समूह अन्ना की रैली को समर्थन देने के लिए जरूर एकत्रित हुआ. रैली में शामिल होने आए लोगों के हाथों में तिरंगा भी नजर आया.

अन्ना का मौन

"अन्ना हजारे की रैली जनतंत्र के लिए जरुरी है, वे लोगों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए जगा रहे हैं. वे समाज और सरकार की गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ जनमत तैयार कर रहे हैं."

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

इस रैली को लेकर पटना में उत्साह नहीं दिखने के पीछे दो वजहों को अहम माना जा रहा है.

एक तो अन्ना हजारे हमेशा बिहार में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलने से परहेज किया है. उन्होंने नीतीश कुमार सरकार के सुशासन की तारीफ़ जरूर की लेकिन कथित सुशासन में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर अन्ना ने अब तक चुप्पी साधे रखी है.

दूसरी ओर महाराष्ट्र में जिस तरह से राज ठाकरे की पार्टी और शिवसेना ने बिहार के लोगों को निशाना बनाया और उनके साथ मार पीट की, उसपर भी अन्ना हजारे ने कोई बयान नहीं दिया.

बुधवार की रैली में भी अन्ना हजारे ने बिहार के भ्रष्टाचार और महाराष्ट्र में बिहारियों के खिलाफ राज ठाकरे और शिवसेना की गतिविधियों पर कोई राय जाहिर नहीं की.

अन्ना हजारे

अन्ना ने नए मोर्चे के गठन की घोषणा की है.

यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने इस रैली का विरोध करते हुए मंगलवार की शाम को एक जुलूस भी निकला. इन लोगों की मांग है कि अन्ना हजारे को इन दोनों मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करनी चाहिए.

उधर अन्ना हजारे की रैली को राज्य के मुखिया नीतीश कुमार ने लोकतंत्र के लिए जरूरी कदम बताया है.

उन्होंने कहा, “अन्ना हजारे की रैली जनतंत्र के लिए जरुरी है, वे लोगों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए जगा रहे हैं. वे समाज और सरकार की गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ जनमत तैयार कर रहे हैं. ये सच है कि जेपी आंदोलन का संकल्प अभी अधूरा है, इसलिए अन्ना हजारे के जनांदोल का स्वागत है.”

जाहिर नीतीश कुमार इस रैली को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रैली नहीं मानते हुए लोकतंत्र की रैली बताने में जुटे हैं.

अन्ना का एलान

अन्ना हजारे की रैली में उनके साथ मंच पर पूर्व सेनाध्यक्ष जेनरल वीके सिंह, जल पुरुष राजेंद्र सिंह, आदिवासियों के हकों की लड़ाई लड़ने वाले पीवी राजगोपाल और मुस्लिम नेता सैय्यद गिलानी शामिल हैं.

हालांकि किरण बेदी देर से रैली में पहुंची थीं.

मंच पर मौजूद वक्ताओं ने इस रैली को आजादी की दूसरी लड़ाई की शुरुआत बताया.

जनतांत्रिक मोर्चा के लिए अन्ना ने लोगों से सुझाव देने की अपील भी की. इसके लिए उन्होंने कुछ टेलीफोन नंबर भी जारी किए हैं.

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