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तेलंगाना पर फैसला टला, समर्थकों में आक्रोश

 रविवार, 27 जनवरी, 2013 को 21:39 IST तक के समाचार

उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने अलग तेलंगाना राज्य की मांग में जमकर प्रदर्शन किया.

पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने कहा है कि इस समस्या के समाधान के लिए कुछ और समय की जरूरत है.

इससे पहले गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि वह 28 जनवरी की तारीख से पहले ही तेलंगाना की समस्या के समाधान की घोषणा करेंगे.

लेकिन आज केंद्र की तय की गई समय सीमा का आखिरी दिन था और तेलंगाना में इसको लेकर जबरदस्त उत्साह और तनाव का माहौल था.

कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद और गृह मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अभी और विचार विमर्श की जरूरत है.

फैसला टलने पर का तेलंगाना समर्थकों में नाराजगी का माहौल है.

कांग्रेस कोर कमेटी की दिल्ली में रविवार को हुई बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि तेलंगाना के मुद्दे पर सलाह मशविरे के लिए मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और तीनों क्षेत्रों के नेताओं को दिल्ली बुलाया जाएगा.

लेकिन इस प्रक्रिया के पूरी होने की समय सीमा के बारे में आजाद ने कुछ नहीं बताया.

उन्होंने कहा कि इसमें कुछ और दिन लगेंगे.

सरकार का बयान

"कांग्रेस ने एक बार फिर से तेलंगाना की जनता को धोखा दिया है और साबित किया है कि वह इतने दिनों से तेलंगाना के मुद्दे पर झूठ बोल रही थी"

टी हरीश राव, टीआरएस नेता

इसके कुछ देर बाद ही गृह मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि अभी बातचीत जारी है और पहले से तय की गई मियाद के भीतर फैसला नहीं लिया जा सका है. इसमें कुछ और दिन लगेंगे.

दिल्ली में हुई इन घोषणाओं पर पूरे तेलंगाना में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.

हैदराबाद के इंदिरा पार्क में 36 घंटों के अनशन पर बैठे हजारों तेलंगाना समर्थकों के बीच राजनीतिक नेताओं ने केंद्र की कड़ी निंदा की.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता टी हरीश राव ने कहा, "कांग्रेस ने एक बार फिर से तेलंगाना की जनता को धोखा दिया है और साबित किया है कि वह इतने दिनों से तेलंगाना के मुद्दे पर झूठ बोल रही थी."

उन्होंने तेलंगाना क्षेत्र से आने वाले कांग्रेसी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से पार्टी से इस्तीफा देकर अलग राज्य के लिए संघर्ष में शामिल होने की अपील की.

हरीश राव ने कहा कि अब पूरी लड़ाई का निशाना कांग्रेस पार्टी ही होगी.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक आचार्य कोदंडा राम ने कहा की यह भूख हड़ताल कल शाम तक चलेगी.

उन्होंने कहा कि इसके बाद ही भावी रणनीति की घोषणा की जाएगी.

विश्वविद्यालय के छात्रों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया

कोंदडा राम ने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि कांग्रेस आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के नेताओं के दबाव में आकर तेलंगाना राज्य देना नहीं चाहती.

भाजपा और भाकपा के अलावा सरकारी कर्मचारियों और छात्रों संगठनों ने भी केंद्र सरकार की इस घोषणा की निंदा की है.

रविवार को दिन भर हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना में ज़बरदस्त तनाव का माहौल रहा क्योंकि पुलिस ने इंदिरा पार्क में भूख हड़ताल की इजाजत देने से इनकार कर दिया था.

साथ ही इसमें भाग लेने के लिए आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था जिनमें कई विधायक भी शामिल थे.

झड़प

उस्मानिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों और पुलिस के बीच झडपें हुईं क्योंकि पुलिस ने छात्रों को राजभवन तक जुलूस निकलने की इजाजत नहीं दी थी.

पुलिस की तरफ से भूख हड़ताल की अनुमति न मिलने पर टीआरएस विधायकों ने विधानसभा के सामने ही गाँधी जी की प्रतिमा के नजदीक भूख हड़ताल शुरू कर दी.

बाद में सरकार का रवैया कुछ नर्म हुआ और इंदिरा पार्क में कार्यक्रम की इजाजत दे दी गई.

इधर केंद्र सरकार की ओर से फैसले में देरी की खुद कांग्रेसी सांसदों ने भी निंदा की है.

लोकसभा सदस्य एम जगन्नाथम ने कहा की इससे लोगों की नज़र में कांग्रेस की साख और विश्वसनीयता और भी घट गई है और लोग पार्टी को धोखेबाज़ कह रहे हैं.

एक अन्य लोकसभा सदस्य जी विवेक ने कहा की कल तेलंगाना सांसदों की बैठक होगी जिसमें सख्त फैसला लिया जाएगा.

इससे पहले जी विवेक इस्तीफे की धमकी दे चुके हैं।

इधर रविवार को हुई केंद्र सरकार की घोषणा पर पृथक तेलंगाना का विरोध कर रहे आंध्र और रायलसीमा के नेताओं को राहत मिली है.

इनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस के ही कई मंत्री, सांसद और विधायक भी शामिल हैं.

प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

जब से गृह मंत्री ने तेलंगाना के समाधान के लिए एक महीने की मियाद तय की थी आंध्र और रायलसीमा में भी तनाव बढ़ रहा था.

और वहां भी छात्र और सरकारी कर्मचारी संयुक्त आंध्रप्रदेश के समर्थन में आंदोलन कर रहे थे.

कांग्रेस की परेशानी

कांग्रेस की परेशानी यही है है की अगर वह तेलंगाना नहीं बनाती है तो तेलंगाना क्षेत्र उस के हाथ से निकल जाएगा.

तेलंगाना में लोक सभा की 17 सीटें हैं. यदि पार्टी तेलंगाना राज्य का समर्थन करती है तो उसे आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र में बग़ावत का सामना करना पड़ सकता है.

शेष आंध्र प्रदेश में लोक सभा की 25 सीटें हैं.

कांग्रेस को अगले लोकसभा चनाव में दोबारा सत्ता में लौटने के लिए आंध्र में अच्छे प्रदर्शन की ज़रुरत है क्योंकि 2009 में उसे इसी राज्य में ही सब से ज्यादा 33 सीटें मिली थीं.

इस के अलावा कांग्रेस एक डर यह भी है कि अगर उस ने तेलंगाना राज्य की घोषणा कर दी तो आंध्र और रायलसीमा के विधायक त्याग पत्र दे देंगे जिस से किरण कुमार रेड्डी सरकार गिर जाएगी और राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ सकता है.

तेलंगाना के समर्थक चाहते हैं कि कांग्रेस के विधायक भी ऐसा ही करें और तेलंगाना नहीं बनता है तो वोह त्याग पत्र देकर सरकार गिरा दें.

अब यह सरकार कोई गिराएगा या नहीं यह बहत जल्द ही मालूम पड़ जाएगा.

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