बुलावा न भेजे जाने से तस्लीमा नसरीन नाराज़

 शनिवार, 26 जनवरी, 2013 को 16:03 IST तक के समाचार
तस्लीमा नसरीन

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर टिप्पणी करते हुए आयोजकों को "रीढ़विहीन और ढोंगी" करार दिया है.

पिछली बार बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन विरोधियों का गुस्सा झेल चुके कोलकाता पुस्तक मेले के आयोजकों को इस बार तस्लीमा नसरीन के गुस्से का सामना करना पड़ा है.

क्लिक करें तस्लीमा ने न्योता नहीं मिलने पर दुख जताया है. संवाददाता को भेजे एक ई-मेल में इस बांग्लादेशी लेखिका ने कहा है, "मुझे पुस्तक मेले का न्योता नहीं मिला है. कोलकाता मेरे दूसरे घर जैसा है. मैं हमेशा वहां जाना चाहती हूँ."

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर तो उन्होंने और कड़ी टिप्पणी करते हुए आयोजकों को 'रीढ़विहीन और ढोंगी' करार दिया है.

तस्लीमा तो नहीं लेकिन आयोजकों ने इस मेले में बांग्लादेश के दर्जनों कवियों और साहित्यकारों को बुलाया है. पुस्तक मेले के आयोजकों ने जयपुर साहित्य उत्सव से सबक लेते हुए इस बार तस्लीमा को न्योता नहीं भेजा है.

कोलकाता पुस्तक मेला 26 जनवरी से शुरू हुआ है और यहाँ पाँच दिनी साहित्य उत्सव 30 जनवरी से होगा. आयोजक नहीं चाहते कि पिछले साल सलमान रुश्दी के सवाल पर जयपुर उत्सव में जो बवाल हुआ वह तस्लीमा के मुद्दे पर यहां भी दोहराया जाए.

"हम मेले के दौरान होने वाले साहित्य उत्सव पर विवादों की छाया नहीं पड़ने देना चाहते. इसलिए हमने तस्लीमा को न्योता नहीं भेजा है"

मालविका बनर्जी, प्रवक्ता, पुस्तक मेला आयोजन समिति

पुस्तक मेले की आयोजक बुकसेलर्स एंड पब्लिशर्स गिल्ड की प्रवक्ता मालविका बनर्जी भी इस बात की पुष्टि करती हैं. वह कहती हैं, "हम मेले के दौरान होने वाले साहित्य उत्सव पर विवादों की छाया नहीं पड़ने देना चाहते. इसलिए हमने तस्लीमा को न्योता नहीं भेजा है." वह कहती हैं कि बांग्लादेश से दूसरे कई साहित्यकार तो आ ही रहे हैं. ऐसे में किसी एक के आने या नहीं आने से क्या फर्क पड़ता है.

बंगाल में सर्वाधिक विरोध

तस्लीमा को भले ही पश्चिम बंगाल अपना दूसरा घर लगता हो लेकिन वहीं उनको लेकर सबसे ज्यादा विवाद होते रहे हैं. कुछ महीने पहले ही वो सुनील गंगोपाध्याय समेत बांग्ला के कई लेखकों पर यौन शोषण के आरोप लगा कर सुर्ख़ियों में थीं.

"हम मेले के दौरान होने वाले साहित्य उत्सव पर विवादों की छाया नहीं पड़ने देना चाहते. इसलिए हमने तस्लीमा को न्योता नहीं भेजा है. बांग्लादेश से दूसरे कई साहित्यकार तो आ ही रहे हैं. ऐसे में किसी एक के आने या नहीं आने से क्या फर्क पड़ता है"

मालविका बनर्जी, प्रवक्ता बुकसेलर्स एंड पब्लिशर्स गिल्ड

वर्ष 2007 में अल्पसंख्यक संगठनों के विरोध की वजह से तस्लीमा को कोलकाता से रातोंरात भागना पड़ा था. उसके बाद से वह कभी यहां लौट नहीं सकी हैं. तब राज्य में सीपीएम की अगुवाई वाली वाममोर्चा सरकार सत्ता में थी. लेकिन सत्ता बदलने के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उनको यहां आने की अनुमति नहीं मिल सकी है.

यह संयोग नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के नेता इदरीस अली की अगुवाई में ही पिछले साल पुस्तक मेले में क्लिक करें तस्लीमा के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे. तस्लीमा की पुस्तकों के विमोचन के सवाल पर पिछले साल पुस्तक मेले में जम कर हंगामा हुआ था. अल्पसंख्यक संगठनों के विरोध की वजह से आयोजकों को ऐन आखिरी मौके पर वह समारोह रद्द करना पड़ा था.

उसके बाद तस्लीमा के समर्थकों ने एक दूसरे स्टॉल पर उनकी पुस्तक का लोकर्पण किया था. इसलिए इस बार आयोजक फूंक-फूंक कर क़दम रख रहे हैं.

जयपुर से होड़

26 जनवरी से शुरू हुए मेले की तैयारी लंबे समय से चल रही थी.

जाने-माने उपन्यासकार शीर्षेंदू मुखर्जी और अमिताभ घोष 30 जनवरी को कोलकाता साहित्य उत्सव का उद्घाटन करेंगे. मेले के दौरान होने वाले पांच दिनी कोलकाता साहित्य उत्सव की मुख्य संयोजक मालविका का दावा है कि यह आयोजन जयपुर साहित्य उत्सव के मुकाबले बड़ा और बेहतर होगा. वह कहती हैं, "इस उत्सव में देश-विदेश के सौ से भी ज्यादा कवि और साहित्यकार शिरकत करेंगे. जयपुर उत्सव के मुकाबले बेहतर वक्ताओं को यहां बुलाया गया है."

उत्सव के दौरान विभिन्न विषयों पर परिचर्चा के लिए अलग-अलग 40 सत्र आयोजित किए जाएंगे. इस दौरान भारतीय सिनेमा के सौ साल पूरे होने के मौके पर परिचर्चा आयोजित की जाएगी. उन साहित्यकारों की याद में भी एक खास आयोजन होगा जो पिछले साल दुनिया से चले गए.

इस दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली एक अन्य पूर्व कप्तान टाइगर पटौदी पर उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर की लिखी पुस्तक का लोकर्पण करेंगे. साहित्य उत्सव के दौरान शर्मिला टैगोर समेत कई जानी-मानी अभिनेत्रियां निर्देशक ऋतुपर्णो घोष के साथ सत्यजीत रे की फिल्मों के महिला किरदारों पर आयोजित एक विमर्श में हिस्सा लेंगी.

यह उत्सव दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड की छाया से भी अछूता नहीं रहेगा. अभिनेत्री शर्मिला टैगोर, अपर्णा सेन और गीतकार जावेद अख्तर इस सवाल पर विमर्श करेंगे कि क्या बलात्कारियों को फांसी की सजा ऐसे मामलों में न्याय पाने की राह में बाधा साबित होगी.

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