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कैसे बढ़ने वाला है आपका मोबाइल बिल

 शनिवार, 26 जनवरी, 2013 को 07:06 IST तक के समाचार
मोबाइल

बिना दरों की वृद्धि के ही आपको अपने मोबाइल फोन पर अधिक खर्च उठाना होगा.

अगर आप प्रीपेड मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं तो अब और पैसे खर्च करने को तैयार हो जाएं. हालांकि कंपनियों ने मोबाइल फोन की दरों में वृद्धि नहीं की है लेकिन किसी ने छूट में कमी की है तो किसी ने 'फ्रीटाइम' में कटौती की है.

यानी बिना दरों की वृद्धि के ही आपको अपने मोबाइल फोन पर अधिक खर्च उठाना होगा.

फिलहाल एयरटेल और आइडिया ने आपकी जेब से ज़्यादा पैसा खींचने की तरकीब बनाई है.

कुछ अन्य बड़े ऑपरेटरों ने भी आने वाले दिनों में इस तरह के बदलाव करने के संकेत दिए हैं.

एयरटेल के एक अधिकारी ने बताया कि टैरिफ में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है लेकिन कुछ डिस्काउंट आदि जो पहले दिए जा रहे थे उन्हें "तर्कसंगत" करने के लिए बदलाव किए गए है.

"हमने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. अधिकतर सर्कलों में हमने कंपनी को प्रोमोट करने के लिए दिए जाने वाले फायदों में कटौती की है और फ्री मिनट भी कम किए हैं. हम हमने ग्राहकों के लिए नेटवर्क और सेवाओं में सुधारों के लिए प्रतिबद्ध हैं."

एयरटेल प्रवक्ता

उन्होंने कहा कि फोन कॉल की कीमतों में सीधे सीधे कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है लेकिन तीन तरीकों के बदलाव किए गए हैं:

न्यूनतम कीमत में वृद्धि

अगर आप पहले चंडीगढ़ में 30 रुपए के रीचार्ज में 30 मिनट का टॉकटाइम पाते थे तो अब इस वाउचर की कीमत को बढ़ा कर 35 रुपए किया गया है. यानी आपको पाँच रुपए ज़्यादा ख़र्च करने होंगे. हालांकि एक अधिकारी ने बताया कि अलग अलग सर्कल मे विभिन्न बदलाव किए गए हैं.

उतने ही पैसे लेकिन कम टॉकटाइम

दूसरी तरह का बदलाव यह किया गया है कि डिस्काउंट मिलने वाले मिनट कम कर दिए गए हैं. जैसे कि मुंबई में एयरटेल का 'स्पेशल वेल्यू वाउचर' 71 रुपए में आपको 135 मिनट देता था अब इतने ही पैसों में आपको केवल 125 मिनट ही मिलेंगे. कहीं कहीं टॉकटाइम को घटा कर 120 मिनट भी किया गया है.

वैधता

तीसरे बदलाव में वाउचर की वैधता की अवधि को कम कर दिया गया है.

मिसाल के तौर पर दिल्ली में 45 रुपए का एक वाउचर 14 दिन के लिए मान्य था अब इसे घटा कर 10 दिन किया गया है. यानी पहले आपको पूरे महीने के लिए दो वाउचर खरीदने पड़ते थे अब तीन खरीदने होंगे.

हालांकि टेलिकॉम मामलों के कई जानकार कंपिनयों के इस कदम को उनके साल दर साल 'घट रहे मुनाफे' के साथ जोड़ कर देख रहे हैं.

आशुतोष सिन्हा कहते हैं, ''सबसे कम दरों की स्थिति उस समय थी जब कंपनियो को ग्राहक चाहिए थे. अब वो नए ग्राहक नहीं तलाश रहे हैं अब वो चाहते हैं कि जो ग्राहक हैं वो उन्हें ज़्यादा पैसे दें.''

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