BBC navigation

शीला दीक्षित को बलात्कार के आंकड़ों पर भरोसा नहीं

 गुरुवार, 24 जनवरी, 2013 को 08:17 IST तक के समाचार

दिसंबर में एक युवती के साथ हुए बर्बर बलात्कार के बाद शीला सरकार की काफी आलोचना हुई थी

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली पुलिस के बलात्कार के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि उन्हें ये समझ नहीं आता कि इन आंकड़ों को किस आधार पर जुटाया गया है.

दिल्ली पुलिस की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 में राजधानी में 706 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए.

इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए शीला दीक्षित ने कहा, “ज़्यादातर बलात्कार मामले या तो घरों की चारदीवारी में होते हैं या दोषी महिलाओं की जान-पहचान वाले होते हैं. इन मामलों के बारे में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की जाती. इस आंकड़े का आधार मेरी समझ से बाहर है. मैं ये नहीं कहना चाहती कि ये आंकड़ा गलत है, लेकिन मैं नहीं जानती कि ये आंकड़ा कितना पुख्ता है.”

गौरतलब है कि 2012 के बलात्कार आंकड़ें 2011 के मुकाबले 24 प्रतिशत ज़्यादा हैं. साल 2011 में दिल्ली में बलात्कार के 572 मामले सामने आए थे.

16 दिसंबर को दिल्ली में एक युवती के साथ हुए बर्बर सामूहिक बलात्कार मामले के बारे में शीला दीक्षित ने कहा कि वो मामला एक अपवाद है और आमतौर पर ऐसे मामले रोज़-रोज़ देखने को नहीं मिलते.

‘खुल गई आंखें’

"ज़्यादातर बलात्कार मामले या तो घरों की चारदीवारी में होते हैं या दोषी महिलाओं की जान-पहचान वाले होते हैं. इन मामलों के बारे में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की जाती. इस आंकड़े का आधार मेरी समझ से बाहर है"

शीला दीक्षित, दिल्ली की मुख्यमंत्री

उनका कहना था, "ये मामला बेहद असाधारण था और ऐसी घटनाएं सभ्य समाज में नहीं होती. लेकिन जो इस भयावह हादसे से अच्छाई निकल कर आई, वो ये थी कि इस हादसे ने हमारी आंखे खोल दी."

उन्होंने ये भी कहा कि महिलाएं अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास जाने से कतराती है क्योंकि वे जानती हैं कि उन्हें पुलिस थानों में अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलती.

16 दिसंबर की सामूहिक बलात्कार घटना के दो हफ्ते बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक महिला हेल्पलाइन बनाई.

जब उनसे पूछा गया कि दिल्ली पुलिस की महिला हेल्पलाइन होने के बावजूद इस हेल्पलाइन की ज़रूरत क्यों महसूस की गई, तो उन्होंने कहा, “हमें ये लगा कि महिलाओं के लिए ऐसा कोई मंच नहीं है जहां वो खुल कर अपनी बात रख सके. पुलिस को पीड़ितों के मित्र की भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. महिलाएं बदनामी के डर से पुलिस के पास नहीं जाती. 181 हेल्पलाइन पर महिलाएं खुल कर अपनी समस्याओं के बारे में हमें बताती हैं.”

उनका कहना था कि इस हेल्पलाइन पर उन्हें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.