असद ओवैसी को ज़मानत, भाई को राहत नहीं

 शुक्रवार, 25 जनवरी, 2013 को 00:04 IST तक के समाचार

गुरुवार देर शाम तक रिहा हो सकते हैं असदुद्दीन ओवैसी

आंध्र प्रदेश में मेदक जिले के सेशन कोर्ट ने मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ज़मानत मंज़ूर कर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है.

अदालत ने कहा है की ओवैसी को दस हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें रिहा किया जाए.

इससे पहले इसी जिले की एक निचली अदालत ने गत सोमवार को ओवैसी को उस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था जब वो अपने खिलाफ एक गैर ज़मानती वारंट वापस लेने की याचिका के साथ अदालत में पेश हुए थे.

यह वारंट 2005 के उस मामले के संबंध में जारी किया गया था जिसमें असदुद्दीन ओवैसी और कई दूसरे लोगों पर आरोप था की उन्होंने एक सड़क के विस्तार के लिए एक मस्जिद को ध्वस्त करने के प्रशासन की करवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था और अधिकारियों को काम करने से रोका था.

असदुद्दीन ओवैसी के अलावा इस मामले में उन के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी और तीन दूसरे विधायक समेत 24 अन्य लोग आरोपी हैं.

अकबरुद्दीन को अभी राहत नहीं

उधर, भड़काऊ भाषण के आरोप में आदिलाबाद जिले की जेल में बंद अकबरुद्दीन ओवैसी भी इस मामले में ज़मानत के लिए याचिका दाखिल कर चुके हैं.

इससे पहले, असदुद्दीन ओवैसी की दो ज़मानत याचिकाओं को मेदक जिले की स्थानीय अदालत ने यह कह कर खारिज कर दिया था की उन्होंने एक सांसद और वकील होने के बावजूद अदालत के वारंट की अनदेखी की थी और अदालत में हाज़िर नहीं हुए थे.

अकबरुद्दीन ओवैसी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. उनकी 14 दिन की न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद भी निर्मल की स्थानीय अदालत ने उन की ज़मानत की याचिका रद्द कर दी है और न्यायिक हिरासत को पांच फरवरी तक बढ़ा दिया है.

अकबरुद्दीन का स्वास्थ्य ठीक नहीं

वकीलों ने अदिलाबाद जिले की सेशन अदालत में ज़मानत याचिका दाखिल की. वहां पर उनके वकील निरंजन रेड्डी ने अदालत में दलील पेश की है कि अकबरुद्दीन पर हिन्दू देवी देवताओं के सम्बन्ध में अपमान जनक बातें कहने का जो आरोप लगाया गया है वह सही नहीं है.

उनका कहना था कि बातें उन्होंने खुद नहीं कहीं थी बल्कि, मशहूर वकील राम जेठमलानी ने कही थीं और ओवैसी ने केवल जेठमलानी के हवाले से उसे दोहराया था.

इस बीच, अकबरुद्दीन ओवैसी के वकीलों और डॉक्टरों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है. आदिलाबाद जेल और नगर में उनकी चिकित्सा की ठीक व्यवस्था नहीं हो पा रही है जसकी वजह से उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ सकती है.

डॉक्टरों का कहना है की दो वर्ष पहले एक जानलेवा हमले के बाद से उनके पेट में जो भीतरी घाव हैं वो फिर हरे हो गए हैं जिससे उनके पेट में दर्द है और उन्हें जेल में जिस तरह का खाना दिया जा रहा है उस से भी तकलीफ बढ़ रही है.

उनके दोनों गुर्दे भी सामान्य ढंग से काम नहीं कर रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है की एहतियात के तौर पर अकबरुद्दीन को किसी ऐसी जेल में रखा जाना चाहिए जो किसी अस्पताल से निकट हो ताकि किसी आपातकालीन स्थिति में उन्हें वहां ले जा जा सके.

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