तेलंगाना पर आंध्र में मच सकती है उथलपुथल

  • 15 जनवरी 2013
तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस नेता और मंत्री अपनी रणनीति तय करने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं
तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस नेता और मंत्री अपनी रणनीति तय करने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं.

अब जबकि तेलंगाना समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार की समय सीमा समाप्त होने में केवल दो सप्ताह रह गए हैं आंध्र प्रदेश के दो मंत्रियों ने दावा किया है की तेलंगाना राज्य बहुत जल्द एक हकीक़त होगा.

डी नगेंदर और डी श्रीधर बाबु ने कहा है की उन्हें केंद्र से ऐसे संकेत मिले हैं की उस ने आंध्र प्रदेश के बटवारे का फैसला कर लिया है और 28 जनवरी से पहले इस की घोषणा कर दी जाएगी.

कुछ इसी तरह की बात तेलंगाना से राज्य सभा सदस्य पी गोवरधन रेड्डी ने भी कही है.

नगेंदर हैदराबाद के निवासी हैं और खेल मंत्री हैं.

उन्होंने कहा कि हैदराबाद को वर्ष के लिए तेलंगाना और आंध्र राज्यों की संजुक्त राजधानी बनाया जाएगा लेकिन उन्होंने राजधानी को केंद्र शासित क्षेत्र बनाने की संभावना से इंकार किया.

हैदराबाद का क्या होगा?

नगेंदर का ये बयान काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक वो आंध्र के बटवारे का विरोध करते रहे हैं और उन्होंने ख़ुद को पार्टी के उन नेताओं से अलग थलग रखा था जो तेलंगाना के समर्थन में अभियान चला रहे हैं.

नगेंदर ही की तरह तेलंगाना क्षेत्र से एक और मंत्री श्रीधर राव ने राज्य के जल्द बनने की बात कही लेकिन उन्होंने हैदराबाद के तेलंगाना में जाने की बात पर ज़ोर दिया.

तेलंगाना के मंत्रियों का बयान ठीक उसी समय आया है जब तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोन को अधिक तेज़ करने की बात कही है. समिति का कहना है कि वो तेलंगाना क्षेत्र से आने वाले मंत्रियों पर दबाव बढ़ाएगी की वो नए सुबे के समर्थन में खुल कर सामने आंए.

हैदराबाद ने निवासी मंत्री नगेंदर पहले अलग तेलंगाना क्षेत्र के विरोधी थे
हैदराबाद निवासी, मंत्री नगेंदर पहले अलग तेलंगाना राज्य के विरोधी थे.

जवाबी रणनीति

इन दो वरिष्ट मंत्रियों के बयानों ने तेलंगाना का विरोध करने वाले आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के कांग्रेसी नेताओं में एक खलबली मच दी . हालांकि वो ये दावा कर रहे हैं कि केंद्र आंध्र प्रदेश का बटवारा नहीं करेगा लेकिन निजी तौर पर वो अपनी जवाबी रणनीति तैयार करने में भी लगे हैं.

आंध्र के एक वरिष्ट कांग्रेसी नेता ने कहा की अगर केंद्र सरकार तेलंगाना की स्थापना का फैसला करती है तो फिर उनके पास अपने त्यागपत्र देने के सिवा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा.

उन्होंने कहा कि आंध्र और रायलसीमा के तमाम कांग्रेसी विधायक और सांसद इस मामले पर इस्तीफ़ा दे देंगे.

राज्य में इसी तरह की स्थिति साल 2009 में भी उत्पन्न हुई थी जबकि तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने तेलंगाना की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी.

तेलंगाना के कांग्रेसी सांसदों के काफी दबाव के बाद गृह मंत्री सुशिल कुमार शिंडे ने 28 दिसम्बर को आंध्र प्रदेश के आठ राजनीतिक दलों की एक बैठक दिल्ली में बुलाई थी और उनके विचार सुनने के बाद घोषणा की थी मामले का समाधान महीने भर के भीतर कर दिया जाएगा.