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आठ दिन के भीतर आया बलात्कार पर फैसला

 शुक्रवार, 11 जनवरी, 2013 को 15:42 IST तक के समाचार
बलात्कार पर विरोध

दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता उपायों की मांग हो रही है

यौन अपराधों से जुड़े मामलों में फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए जल्द से जल्द इंसाफ की मांग के बीच पंजाब में एक निचली अदालत ने बलात्कार और अपहरण के मामले को तेजी से निपटाया है.

होशियारपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जेएस भिंडर ने मामला अदालत में आने के आठ दिन के भीतर दोषी को दस साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है. ये 17 वर्षीय लड़की के अपहरण और बलात्कार का मामला है.

लड़की ने एक फैक्ट्री में अपने साथ काम करने वाले पवन दुबे नाम के व्यक्ति पर खुद को परेशान करने आरोप लगाया था. लड़की के मुताबिक नौकरी छोड़ देने के बाद भी दुबे ने उन्हें तंग करना नहीं छोड़ा.

अभियोजन पक्ष ने कहा कि अपने साथियों के साथ मिल कर दुबे ने पिछले साल मई में इस लड़की का अपहरण कर लिया.

पहले अपहरण फिर बलात्कार

पीड़ित के अनुसार उन्हें दिल्ली ले जा कर 15 दिन तक उनके साथ पवन दुबे और उनके साधियों ने बलात्कार किया और फिर छोड़ दिया.

पिछले साल अगस्त में पुलिस ने अपहरण और बलात्कार का मामला दर्ज दिया. सितंबर में अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया था.

अभियुक्त ने अदालत से फरियाद की कि वह एक 'गरीब व्यक्ति और अविवाहित है और उस पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी है.'

लेकिन न्यायाधीश ने फैसला सुनाया: ''अपराधी जय प्रकाश दिवेदी उर्फ पवन दुबे ने एक असहाय महिला के साथ बलात्कार किया गया है. गैर-वाजिब बरी होने वाले लोगों की बढ़ती संख्या की वजह से बलात्कारियों के लिए मौत की सजा की मांग हो रही है.''

न्यायाधीश ने आईपीसी की धारा 363 के तहत अपहरण के लिए पांच साल, धारा 376 के तहत बलात्कार के लिए दस साल और धारा 366 के तहत सात साल की सज़ा सुनाई है. ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी.

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