झारखंड फिर राजनीतिक संकट की चपेट में

  • 7 जनवरी 2013
शिबू सोरेन, अर्जुन मुंडा
झारखंड अपने गठन के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है

झारखंड में शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सत्तारुढ़ बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है जिसके साथ ही अर्जुन मुंडा सरकार अल्पमत में आ गई है.

झामुमो नेता और सरकार में उप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि पार्टी का यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है और इस बारे में बीजेपी के नेताओं से कई बार बातचीत भी की गई है.

उल्लेखनीय है कि झामुमो बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की मांग करती रही है और कहती रही है कि झामुमो को सरकार के नेतृत्व का मौका दिया जाए.

हालांकि अभी झामुमो ने राज्यपाल के पास समर्थन वापसी का पत्र नहीं भेजा है इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी और झामुमो के बीच सुलह भी हो सकती है.

झारखंड में 82 सदस्यों की विधानसभा में जिसमें झामुमो और बीजेपी दोनों के पास 18-18 विधायक हैं.इसके अलावा छोटे छोटे दलों के पास कुछ सीटें हैं.

इससे पहले मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शिबू सोरेन से भी मुलाक़ात की थी लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता ही गया है.

झामुमो का आरोप है कि जब उन्होंने बीजेपी को समर्थन दिया था तो तय हुआ था कि आधे समय बीजेपी और आधे समय झामुमो सरकार का नेतृत्व करेगी लेकिन अब बीजेपी अपना वादा पूरा नहीं कर रही है.

बीजेपी का कहना है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था.