'मैं बलात्कार पीड़ित हूं...मेरी और कोई पहचान नहीं'

  • 3 जनवरी 2013
यौन हिंसा
बलात्कार के बाद की स्थितियां भी कम त्रासदीपूर्ण नहीं होती.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में हर 14 घंटों पर एक महिला बलात्कार का शिकार होती है. कई घटनाएं हमारी नज़र में आती हैं लेकिन कुछ के बारे में हम कभी नहीं जान पाते.

इंडिया गेट पर बलात्कार के खिलाफ़ कड़े कानून की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों में एक लड़की ऐसी भी थी जिसने यह त्रासदी खुद झेली थी. इस पीड़िता से बात कर एहसास होता है कि परिस्थितियां असल में बलात्कार के बाद कहीं ज़्यादा तकलीफदेह हो जाती हैं.

पीड़िता के मुताबिक उसकी मेडिकल जांच करने वाली डॉक्टर का रवैया बेहद संवेदनहीन था. दो उंगलियों से किए जाने वाले परीक्षण के दौरान वह अमानवीय हो गई थी और यह मेरे लिये बेहद तकलीफ़देह था.

उसने कहा,"लम्हें भर के लिए मुझे लगा कि मेरा कोई वजूद नहीं था, मैं बलात्कार का शिकार हुई महज़ एक लड़की बनकर रह गई थी."

अदालती प्रक्रिया

अस्पताल का तज़ुर्बा भी उस पीड़िता के लिए कम त्रासदीपूर्ण नहीं था. उसने कहा, "मैं अस्पताल के रिसेप्शन पर इंतज़ार कर रही थी कि तभी किसी ने कहा कि उस औरत को बुलाओ जिसके साथ बलात्कार हुआ है. यह आवाज़ मेरे दिमाग में गूंजने लगी".

केस वापस लेने के दबाव का सामना करने वाली इस पीड़िता ने बताया कि बचाव पक्ष का वकील मेरे एक दोस्त से मिला. वह मेरे पास उससे शादी कर लेने का सुझाव लेकर आई.

पीड़िता पर बलात्कारी से शादी करने का लगातार दबाव डाला गया. इसके बारे में पूछे जाने पर वह कहती है,"मुझसे कहा गया कि जो हुआ उसे भूल जाओ, उससे शादी कर लो".

कुंआरेपन पर आमधारणा

बलात्कार पीड़िता
पीड़िता का सामाजिक रूप से अस्वीकार्य हो जाना अधिक तकलीफ़देह होता है.

पीड़िता ने बताया कि भारत में कुंआरेपन पर बहुत ज़ोर दिया जाता है. जिस लम्हें लड़की इसे गंवा देती है, वह अपनी इज़्जत खो देती है.

वह कहती हैं,"अगर आप बलात्कार का शिकार हुई हैं तो समझिए कि आप ने अपने होने का मतलब खो दिया है. लोग आपको स्वीकार नहीं करेंगे. लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत संबल दिया. उनसे मुझे बहुत हिम्मत मिली. मुझे संदेह है कि इस तरह का संबल सभी महिलाओं को मिलता हो. बहुत से मामले कभी सामने नहीं आ पाते. महिलाएं अपनी आप-बीती ज़ाहिर करने से डरती हैं".

इंडिया गेट पर अपनी मौजूदगी को लेकर वे बेहद आशान्वित थीं. उन्होंने बताया कि यह मेरे जीवन का सार्थक पहलू है. विरोध कर रहे लोगों में पुरुषों की अच्छी खासी उपस्थिति पर पीड़िता हैरत में थी.

उन्होंने कहा, "वहाँ बहुत से लोग थे. बहुत से मर्द और आरतें. अच्छी बात यह है कि लोग खुलकर अपनी बात कह रहे हैं. वे अपने सुझाव और अनुभव साझा कर रहे हैं."