आड़ी-तिरछी लकीरों से बलात्कार पर विरोध

 रविवार, 30 दिसंबर, 2012 को 12:29 IST तक के समाचार
मनन चतुर्वेदी

मनन ने शनिवार शाम से 72 घंटे तक जीवंत पेंटिंग का काम शुरू किया है

दिल्ली में क्लिक करें बलात्कार की घटना के क्लिक करें विरोध में कहीं शमा जली, कहीं क्रोध सडको पर फूटा. मगर जयपुर में सामाजिक कार्यकर्ता मनन चतुर्वेदी ने अपने भावों को कैनवास पर उतारा.

मनन ने शनिवार शाम से 72 घंटों तक जीवंत पेंटिंग का काम शुरू किया है. वो अपनी कूची पर कैनवस के जरिए इंसानियत और मुहब्बत के रंग बिखेर रही हैं.

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मनन ने कूची उस वक्त उठाई है जब बीते हुए साल में महज दो दिन बाकी है. लिहाजा मनन का ये काम नये साल के पहले दिन तक चलेगा.

घने कोहरे और तेज ठंड के बीच मनन की कैनवस पर कूची 72 घंटे तक अविरल चलती रहेगी.

क्या मकसद है इसका? मनन कहती है प्यार का सन्देश देना.

''जिंदगी में लोग अपनी ही बाहों में सिमट कर रह गए हैं, बाहों को फैलाना होगा. अपने सिवा औरों की के दर्द को समझना. जब हम सकारात्मक भाव पैदा करेंगे तो बच्चो में नकारात्मक विचार नहीं आएँगे.”

यूँ तो मनन फैशन डिज़ाइनर है मगर उन बच्चो की माँ भी है जो कहीं सड़क किनारे, रेलवे प्लेटफार्म, बस अड्डे और किसी निर्जन स्थान पर बेसहारा छोड़ दिए गए.

परिवार

मनन के घर में ऐसे कोई 50 से ज्यादा बच्चे हैं. वो उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानती हैं.

मनन ने जब जयपुर के स्टेचू सर्किल पर कैनवस पर रंग बिखेरना शुरू किया तो ये बच्चे भी साथ थे. वो मनन को माँ कह कर पुकारते हैं और आज के दौर में एक माँ जानती है औरत घर और बाहर कितनी महफूज हैं.

मनन के हाथ कैनवस पर चित्रों के लिए रेखाएँ खींचते रहे, गोया इन्ही आड़ी-तिरछी लकीरों से भारत में औरत की हिफाजत का सामाजिक और कानूनी खाका खड़ा होगा.

मनन को मलाल है दिल्ली में क्लिक करें ज्यादती का शिकार हुई लड़की चल बसी मगर वो कहती है, “ये एक लड़की की बात नहीं है, वो हम सबको एक पाठ पढ़ा कर गई है, वो हम सबको एकाकार कर गई है. इसके जरिए एक बदलाव आएगा. लोग आत्मा से बदलेंगे.”

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इस सामाजिक कार्यकर्ता का हौसला बढ़ाने जयपुर के पुलिस कमिश्नर बीएल सोनी खुद वहाँ आए और इस कदम की सराहना की.

मनन कहती हैं कि रंगों से समय की सतह पर बड़ा बदलाव आएगा.

“मुझे लगता है पत्थरों और जोर से आवाज लगाने से ज्यादा बदलाव रंग बिखेरने से आएगा, मैं बहुत आशावांन हूँ. रंगों के जरिए अमन और इंसानियत को नई दिशा मिलेगी.”

कैनवस पर बिखरे रंग जब साझा हुए तो उमगो का सतरंगी संसार उतर आया. शायद रंगों से सराबोर कैनवस इंसानियत के हक में उठती आवाज को और बुलंद करें.

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