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बलात्कार क़ानून बदलने के लिए बनी समिति

 सोमवार, 24 दिसंबर, 2012 को 02:00 IST तक के समाचार

दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना पर जनता के बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने रविवार देर रात यौन उत्पीड़न मामलों में मौजूदा क़ानूनों की समीक्षा के लिए एक अधिसूचना जारी कर दी है.

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो कि मौजूदा क़ानूनों में संभावित संशोधन पर सिफारिशें देगी.

समिति को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौपेगी.

समिति महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों में मौजूदा आपराधिक क़ानून की समीक्षा करेगी और अपराधियों के लिए सजा बढ़ाये जाने पर भी विचार करेगी.

जेएस वर्मा की अध्यक्षता में गठित इस समिति में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश लीला सेठ और पूर्व सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया गोपाल सुब्रमण्यम होंगे.

क़ानून में बदलाव

"ये अधिसूचना बताती है कि सरकार दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करने के बारे में गंभीर है. "

सुशील कुमार शिंदे, गृह मंत्री

मौजूदा क़ानून के तहत बलात्कार के लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास है, लेकिन सामूहिक बलात्कार की ताज़ा घटना के बाद उमड़े जन आक्रोश के बाद बलात्कार के दोषियों के लिए मौत की सज़ा की मांग हो रही है.

भाजपा भी इस तरह के अपराध के लिए मौत की सजा़ के पक्ष में है और उसने क़ानून में संशोधन के लिए संसद के विशेष सत्र की मांग भी की है.

गृह मंत्री शिंदे ने कहा कि ये अधिसूचना बताती है कि सरकार दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करने के बारे में गंभीर है.

उन्होंने कहा, "अधिसूचना दर्शाती है, सरकार कितनी गंभीर है और मैं देश विश्वास दिलाता हूं कि सरकार गंभीर हैं."

इससे पहले, पुलिस के विशेष आयुक्त धर्मेन्द्र कुमार ने कहा था कि बलात्कार क़ानूनों में सजा बढ़ाने की संभावना तलाशने के लिए एक समिति का गठन किया जा रहा है.

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