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कीचड़ उछालोगे तो कमल ज़्यादा खिलेगा: मोदी

 शुक्रवार, 21 दिसंबर, 2012 को 01:05 IST तक के समाचार

मोदी ने कामयाबी की हैट्रिक का श्रेय गुजरात की जनता को दिया.

गुजरात में जीत की हैट्रिक बनाने के बाद नरेंद्र मोदी ने देर शाम मीडिया और समर्थकों की मौजूदगी में गुजरात की जनता का आभार प्रगट करते हुए वादा किया है कि वे अगले पांच साल तक आम लोगों की सेवा में जुटे रहेंगे.

लेकिन इस दौरान उनके बयान में कई ऐसे पहलू रहे जो संकेत दे रहे हैं कि मोदी अपनी राजनीतिक छवि को बदलने की कोशिश में जुट चुके हैं. आइए नजर डालते हैं मोदी के भाषण में शामिल बारह अहम बातों पर.

गुजरात के चुनाव के नतीजों ने ये सिद्ध कर दिया है कि देश की जनता और मतदाता अच्छा क्या है, बुरा क्या है, उसको भलीभांति समझता है. जब उसके सामने स्वतंत्र रूप से निर्णय करने का अवसर आता है तब हर किसी की सोच से उपर उठकर और भविष्य पर नज़र रखते हुए वह अपना फ़ैसला सुनाता है.

लोकतंत्र की लंबी प्रक्रिया के दौरान गुजरात का मतदाता परिपक्व हुआ है, सारे लोभ-लालच से ऊपर उठकर अब वह यह सोचता है कि अगर मेरे गुजरात का भला होगा तो कल मेरा भला होगा.

चुनाव से पहले मैंने, भारतीय जनता पार्टी ने नारा दिया था..एकमत गुजरात. लेकिन इसे देश के तमाम राजनीतिक पंडित नहीं समझ पाए. ये ना तो स्पाइसी था और ना ही किसी के ख़िलाफ़. कमल के फूल को लोगों ने उठा लिया और इस मंत्र को भी उठा लिया.

राजनीतिक पंडितों को समझना होगा कि गुजरात की जनता ने 80 के दशक के जातिवादी जहर और उसके दुष्परिणामों को भलीभांति देखा है, अनुभव किया है. इसलिए वे जाति पर आधारित वोटिंग नहीं करते. लिहाजा वे क्षेत्रवाद से ऊपर उठ चुके हैं, जातिवाद से ऊपर उठ चुके हैं..वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सोच रहे हैं.

पहले कहा जाता था कि सरकारों का काम आना-जाना है. एक सरकार पांच साल के लिए आती है, फिर दूसरी आती है, लेकिन इसके चलते आम लोगों के हाथों में कुछ नहीं आता था. लेकिन आप देखिए कि सरकारें बार-बार चुन कर आ रही हैं. ऐसे में राजनीतिक दलों की जबावदेही बढ़ती है.

पहले कहा जाता था कि सुशासन और आर्थिक विकास के मुद्दे भारतीय राजनीति को रास नहीं आते. लेकिन गुजरात ने दिखाया है कि सुशासन और आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव जीते जाते हैं. मेरे लिए मेरे गुजराती भाई हीरो हैं. देश की जनता को सीखना चाहिए कि वे सुशासन और विकास के लिए राजनीतिक दलों पर दबाव बना सकें.

बीते ग्यारह साल के शासन में मैंने एक हिस्से को नाराज किया होगा. कुछ क्षेत्रों को नाराज किया होगा. कठोर निर्णय भी लिया होगा. लेकिन गुजरात की जनता ने मेरा साथ दिया है. मेरे मन में एकमात्र सपना है मेरा गुजरात, मेरा गुजरात, मेरा गुजरात.

इस पूरे चुनाव में मुझे किसी पर भी कोई व्यक्तिगत आरोप लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और ना ही मैंने लगाए. कठोर शब्दों का प्रयोग किया होगा लेकिन लोकतंत्र में मैं किसी को दुश्मन नहीं मानता. खेल जीतना चाहता था, गुजरात की जनता ने मुझे जिता दिया.

कहीं कोई कमी रह गई हो, कहीं कोई गलती रह गई हो तो मैं अपने छह करोड़ गुजराती भाइयों से क्षमा चाहता हूं. जनता-जर्नादन ही ईश्वर का रूप होता है. मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं. सत्ता तो दी, अब आर्शीवाद दीजिए ताकि आगे भी हमसे कोई गलती नहीं हो. हमारे हाथों से किसी का बुरा नहीं हो. जनता जब आर्शीवाद देती है तो गलती होने की संभावना नहीं रहती है.

ये जीत मोदी की जीत नहीं, गुजराती भाइयों-बहनों की जीत है. हमारे कार्यकर्ताओं का पसीना जीत गया, दूसरी पार्टियों का पैसा हार गया.

पार्टी हमारी मां होती है. उसके आंचल में हम होते हैं, पार्टी नहीं होती तो हम कहीं नहीं होते. ये भारतीय जनता पार्टी की ताकत है. ये टीम बीजेपी है. ये टीम गुजरात है. मैं उस टीम का छोटा सा हिस्सा हूं.

अगर आप गुजरात के लोग मुझे इजाजत दें तो 27 दिसंबर को एक दिन के लिए दिल्ली जाना चाहता हूं. गुजरात की सेवा के बहाने हम पूरे देश की किसी कमी को पूरा कर सकेंगे, देश की सेवा कर रहे हैं और भी ज्यादा करेंगे.

मैं आलोचनाओं से विचलित नहीं होता. लोग जब मुझे पत्थर मारते हैं तो मैं उन पत्थरों से सीढ़ी बना देता है. सीढ़ी की हैट्रिक बना दी. कीचड़ उछालोगे तो कमल ज़्यादा खिलेगा.

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