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रहमान मलिक: 'चार बयान चालीस नुक़सान'

 सोमवार, 17 दिसंबर, 2012 को 19:05 IST तक के समाचार
रहमान मालिक

रहमान मालिक तीन दिन की अपनी यात्रा समाप्त कर रविवार को वापस अपने देश चले गए

पाकिस्तानी गृह मंत्री रहमान मलिक अपनी भारत यात्रा को खत्म करके पाकिस्तान चले गए हैं लेकिन उनकी भारत यात्रा के दौरान उठे विवाद चलते ही जा रहे हैं.

सोमवार को भारतीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को मलिक की भारत यात्रा पर बयान देना पड़ा. विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने मलिक और उनकी यात्रा को भारत के लिए नुकसानदेह करार दिया. भाजपा नेता और राज्य सभा सदस्य यशवंत सिन्हा ने भारत सरकार से मांग की है आगामी 25 दिसंबर से आरंभ होने वाला पाकिस्तानी टीम का भारत दौरा रद्द कर दिया जाए.

भारत के सामरिक और कूटनीतिक मामलों पर नज़र रखने वाले थिंक टैंक आईडीएसए से जुड़े सुशांत सरीन कहते हैं कि "रहमान मलिक इस दौरे पर आए थे भारत-पाकिस्तान वीजा समझौते पर अपनी सकारात्मक छाप छोड़ने लेकिन हुआ इसका उलट. वो भारत-पाक संबंधो को और ज़्यादा नुकसान पहुंचा गए."

बयान नंबर एक

"26/11 हमलों में शामिल होने का आरोप झेल रहे हाफ़िज़ सईद के खिलाफ, चरमपंथी अजमल कसाब के बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती"

रहमान मलिक

रहमान मलिक ने भारत में उतरते ही कहा "26/11 हमलों में शामिल होने का आरोप झेल रहे हाफ़िज़ सईद के खिलाफ, चरमपंथी अजमल कसाब के बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती."

सरीन ध्यान दिलाते हैं कि पाकिस्तान से जल्द ही एक न्यायिक आयोग भारत आने वाला है ताकि कसाब के दिए गए बयानों की जांच कर सके. सरीन कहते हैं, "अब अगर कसाब के बयान का कोई अर्थ नहीं है तो वो आयोग यहाँ आकर करेगा क्या."

बयान नंबर दो

साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया को जेनेवा नियमों के खिलाफ यातना देकर मारे जाने पर पाकिस्तानी गृह मंत्री ने कहा, "मैं नहीं कह सकता कि सौरभ कालिया की मौत पाकिस्तानी सेना की गोलियों से हुई थी या वो खराब मौसम का शिकार हुए थे." हालांकि मलिक ने बाद में अपने बयान में सुधार करते हुए कहा था कि पाकिस्तान इस मामले में जांच के लिए तैयार है.

सरीन कहते हैं कि इस मामले पर मलिक या तो चुप रहते या पहले ही जांच की बात कह देते, "वो कैसे कह सकते हैं कि सौरभ कालिया की आँखें खराब मौसम के कारण निकल गईं या उनके शरीर पर सिगरेट से दागने के निशान मौसम के कारण नहीं आ सकते थे."

बयान नंबर तीन

"अब अगर कसाब के बयान का कोई अर्थ नहीं है तो वो आयोग यहाँ आ कर करेगा क्या?"

सुशांत सरीन

मुंबई पर 26/11 के हमलों से जुड़े अबू जुंदाल के मामले पर रहमान मलिक ने कहा, "अबू जुंदाल भारतीय था और भारतीय एजेंसियों के लिए काम करता था जो बाद में पलट गया."

सरीन इस बात पर कहते हैं, "अबू जुंदाल अगर भारतीय एजेंट था तो क्यों पाकिस्तान की सरकार उसके सऊदी अरब से भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ थी और क्यों उसे पाकिस्तानी नागरिक बताया जा रहा था. यह वही रहमान मलिक हैं जिन्होंने अजमल आमिर कसाब की गिरफ्तारी के बाद उसे पाकिस्तानी मानने से यह कह कर इनकार कर दिया था उसका पाकिस्तानी जनसंख्या पंजीकरण प्राधिकरण में कोई रिकॉर्ड नहीं है."

बयान नंबर चार

रहमान मलिक का एक और बयान जिसने खासे विवाद को जन्म दे दिया वो 26/11 और बाबरी मस्जिद को तोड़ने की घटना को एक साथ जोड़ने सा दिख रहा था. मलिक ने कहा था " हम और बंबई धमाके नहीं चाहते, हम और समझौता एक्सप्रेस नहीं चाहते हम और बाबरी मस्जिद नहीं चाहते हम भारत पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र में शांति के लिए साथ काम करना चाहते हैं."

हालाँकि मलिक बाद में इस बयान से भी पलट गए और उन्होंने कहा कि उनके बयान के गलत अर्थ निकाले गए.

"मलिक के भारत दौरे से भारतीय विदेश मंत्रालय में किसी को कोई खास उम्मीद नहीं थी लेकिन किसी को यह भी नहीं पता था कि उनकी मेहमाननवाजी इतनी महंगी पड़ेगी"

सुशांत सरीन

सुशांत के मुताबिक़, "इस बयान में यह कहने की कोशिश थी कि अगर अयोध्या में बाबरी मस्जिद ना गिरती तो शायद 26/11 ना होता. यह एक नकारात्मक और निंदनीय बयान है. यह बयान भी भारत सरकार को एकदम नागवार गुजरा."

'मेहमाननवाजी महंगी पड़ी'

सुशांत सरीन कहते हैं कि "रहमान मलिक बेतुके बयान देने के लिए जाने जाते हैं. मलिक ने कराची में अत्यधिक टारगेट किलिंग के ज़माने में कह दिया था कि यह हत्याएं लोगों की पत्नियां और महिला मित्र करा रही हैं."

भारत-पाकिस्तान संबंधों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन के अनुसार, "मलिक के भारत दौरे से भारतीय विदेश मंत्रालय में किसी को कोई खास उम्मीद नहीं थी लेकिन किसी को यह भी नहीं पता था कि उनकी मेहमाननवाजी इतनी महंगी पड़ेगी."

सरीन कहते हैं, "मलिक की यात्रा दो-चार कूटनीतिक मामलों पर सद्भाव बढ़ाने के लिए थी लेकिन इन चार बयानों से दोनों देशों के संबंधों को चालीस मामलों पर नुकसान हुआ है."

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