BBC navigation

अब पदोन्नति में भी कोटा: राज्य सभा की मुहर

 मंगलवार, 18 दिसंबर, 2012 को 02:58 IST तक के समाचार

प्रमोशन कोटा बिल को सरकार और बीजेपी का समर्थन

राज्यसभा में अनुसूचित जातियों व जनजातियों को पदोन्नति में आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन बिल भारी बहुमत से पास हो गया है.

245 सदस्यों वाले सदन में प्रस्ताव के समर्थन में 206 मत पड़े जबकि 10 सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया. इस प्रस्ताव का समाजवादी पार्टी ने ज़बरदस्त विरोध किया जबकि बहुजन समाज पार्टी ने इसके लिए समर्थन हासिल करने में एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया.

संविधान संशोधन बिल होने के नाते इसको पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की दरकार थी. सरकार ने इस लक्ष्य को आसानी से पार कर लिया क्योंकि 216 उपस्थित सदस्यों में से 206 ने इसके पक्ष में वोट किया.

शिव सेना के चारों सदस्य जो इस बिल का विरोध कर रहे थे, मतदान के समय सदन में मौजूद नहीं थे.

इस बिल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 सितंबर को मंज़ूरी दी थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार के पदोन्नति में आरक्षण देने के फ़ैसले को पलट दिया था.

अपर्याप्त प्रतिनिधित्व

दो दिन तक चली बहस का जवाब देते हुए कार्मिक मामलों के राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि इस बिल से सरकारी नौकरियों में ऊँचे पदों पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लोगों के कम प्रतिनिधित्व में बढ़ोत्तरी होगी.

नारायणसामी का कहना था कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों और पिछड़ी जातियों के प्रति भेदभाव के कारण उच्च पदों पर इनका प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है. वैसे तो 1995 से पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान है लेकिन इंदिरा साहनी केस में आए फ़ैसले से इसमें रोड़े अटकने शुरू हो गए थे.

नारायणसामी का तर्क था कि सभी दल जिनमें समाजवादी पार्टी भी शामिल है, जब आरक्षण का समर्थन करते हैं तो उन्हे पदोन्नति में आरक्षण से क्या आपत्ति हो सकती है.

1995 के बाद प्रोन्नत लोगों पर प्रभाव नहीं

विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सरकार से आश्वासन माँगा कि इस संशोधन से उन लोगों पर असर नहीं पड़ेगा जिनकी 1995 के बाद पदोन्नति हो चुकी है.इस पर सरकार ने कहा कि वह राज्य सरकारों को लिखेगी कि इस कानून का पदोन्नत हो चुके लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए.

समाजवादी पार्टी का कहना था कि सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि इसके गंभीर परिणाम निकल सकते हैं और इसको अदालतों में चुनौती दी जा सकती है.

समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि जहाँ तक नौकरी की शुरुआत में आरक्षण का सवाल है उनका दल इसके खिलाफ नहीं है. लेकिन बाद में सभी लोगों को समान अवसर दिए जाने चाहिए.

उन्हीं की पार्टी के नरेश अग्रवाल का कहना था कि देश में इसके व्यापक विरोध से बचने के लिए बिल को संसदीय स्थाई समिति के पास भेज दिया जाना चाहिए. अब इस बिल को लोक सभा में पेश किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.