कुम्भ की ललक खींच लाई भारत

  • 16 दिसंबर 2012
एंड्रयू अपने परिवार के साथ
एंड्रयू गंगा में प्रदूषण से चिंतित नजर आए.

कुम्भ मेले के बहाने हिंदू धर्म और भारत को जानने-समझने के लिए ऑस्ट्रेलिया का एक परिवार इलाहाबाद आया है जहां वह न केवल हिंदी सीख रहा है बल्कि भक्तों को गंगा पार लगाने के इरादे से नाव बनाने में भी जुटा है.

अपने दोस्तों और पूरे परिवार के साथ हिंदी का ककहरा सीख रहे एंड्रयू नवम्बर में ही इलाहाबाद आ गए थे.

हर दिन हिंदी की पाठशाला जाने वाले एंड्रयू कहते हैं कि वो भारत की प्राचीन संस्कृति और धर्म को समझना चाहते हैं और जानते हैं कि इसके लिए हिंदी सीखना बहुत जरूरी है.

एंड्रयू का मानना है कि कुम्भ का मेला भारत में होने वाला एक ऐसा आयोजन है जहां देश के सभी रंग नज़र आते हैं. शायद यही वजह है कि वो अपना काम-धंधा छोड़कर ऑस्ट्रेलिया से भारत चले आए.

वे कहते हैं, ''महाकुम्भ भारत और दुनिया का एक बड़ा आयोजन है, मैं यहां के धर्म-संस्कृति को जानना चाहता था, इसलिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहां चला आया. हम एक नाव भी बना रहे हैं जिससे लोगों को गंगा पार कराएंगे और किसी से कोई पैसा भी नहीं लेंगे.''

एंड्रयू बताते हैं, ''पूरे परिवार को यहां लाना मुश्किल था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में हमारा अपना घर और काम-धंधा है. भारत के बारे में जानने के लिए कुम्भ आयोजन से बेहतर समय नहीं हो सकता था. करोड़ों लोग यहां जुटते हैं.''

पेइंग गेस्ट भी खुश

एंड्रयू
एंड्रयू इसी नाव से भक्तों को गंगा पार कराना चाहते हैं.

एंड्रयू के पारिवारिक मित्र ढिल्लन भी उनके साथ भारत आए हैं. वो कहते हैं, ''मेरे परिवार को यहां आने पर थोड़ी आपत्ति थी क्योंकि मैं वहां एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कंपनी में काम करता था. लेकिन बाद में सब मान गए. अब हम कुंभ मेले के बाद ही वापस जाएंगे.''

एंड्रयू और उनके साथी गंगा में प्रदूषण से चिंतित नजर आए. उनका प्रयागराज में श्रमदान करने का भी इरादा है.

एंड्रयू और उनका पूरा परिवार जिस घर में पेइंग गेस्ट बनकर रह रहा है, उस घर के लोग भी ऑस्ट्रेलिया से आए इन मेहमानों के साथ पूरी तरह से घुलमिल गया है.

पेइंग गेस्ट की मालकिन लतिका कहती हैं, ''ये लोग हमारे साथ एकदम घुलमिल गए हैं और बड़े आराम से रह रहे हैं. इस मेले की वजह से दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझने का मौका मिला है.''

'जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े'...

ये भजन भले ही प्रभु राम और केवट के लिए बना, लेकिन कुम्भ के इस मेले में जहां भारत की सभ्यता और संस्कृति के कई रंग देखने को मिलेंगे, वहीं एक रंग ये भी लोगों के जेहन में हमेशा के लिए बस जाएगा जब कुछ विदेशी मेहमान देसी लोग यानी यहां आने वाले भक्तों की नैया पार लगाता नजर आएगा.